अमर उजाला ब्यूरो
नेरवा (रोहड़ू)।
शिक्षा खंड चौपाल के तहत बमटा पंचायत का राजकीय माध्यमिक स्कूल घुरला बंद होने के कगार पर है। सरकार ने कुछ साल पहले स्कूल का दर्जा तो बढ़ाया पर यहां पर्याप्त स्टाफ नहीं दिया जा रहा है। सरकार और विभाग की उपेक्षा के कारण स्कूल में बच्चों की संख्या दिन प्रतिदिन घटती जा रही है। आलम यह है कि आज यहां पर मात्र दो बच्चे और एक शिक्षक ही रह गए।
तीन साल पहले इस स्कूल में तीन अध्यापक तैनात थे। इसके बाद स्कूल से दो अध्यापकों के तबादले हो गए। अब यहां पर एकमात्र अध्यापक ही बचा है। शैक्षणिक सत्र 2015 -16 में स्कूल में 30 छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे थे। शैक्षणिक सत्र 2016 -17 में इनकी संख्या घट कर 25 रह गई। शैक्षणिक सत्र 2017-18 में स्कूल में मात्र 12 ही छात्र बचे। घुरला स्कूल को वर्ष 1997 में स्तरोन्नत किया गया था। पंचायत का केंद्र बिंदु होने के कारण ग्राम पंचायत के कशाह, घुरला, भाभर, चड़ौली, बटारा, बाजरौठ व बड़ौला गांव के छात्रों को अपने घरों के पास आठवीं तक की शिक्षा मिल रही थी। लेकिन स्कूल में अध्यापकों के तबादले होने के कारण आज यह स्कूल बंद होने के कगार पर है। स्कूल में इस समय एक विज्ञान विषय का अध्यापक व एक चपरासी ही तैनात है। स्थानीय लोगों का कहना है की यदि स्कूल में पर्याप्त अध्यापक होते तो पंचायत का केंद्र बिंदु होने के चलते इस स्कूल में छात्रों की अच्छी खासी संख्या हो सकती थी। स्कूल में अध्यापक न होने के चलते छात्रों को माध्यमिक स्तर की पढ़ाई के लिए पांच किलोमीटर पैदल सफर कर बमटा स्कूल जाना पड़ रहा है।
कई बार उठाया शिक्षकों की कमी का मुद्दा
स्कूल प्रबंधन समिति अध्यक्ष रणवीर प्रोस्टा, पंचायत उप प्रधान हरदयाल पांटा, पूर्व प्रधान लायक राम नामटा, वार्ड सदस्य सरिता नामटा, सेवानिवृत्त पंचायत सचिव रेलु राम, अभिभावक प्रेम लाल, जोबन दास, सीता राम, सुरेंद्र, संजय, श्यामा नंद, रोशन लाल, सईना देवी, टशी लामा, रोशन लाल, बल बहादुर, भगत राम शर्मा ने बताया कि स्कूल में शिक्षकों कमी का मुद्दा सरकार के समक्ष कई बार उठाया गया है। सरकार स्कूल में अध्यापकों की तैनाती नहीं कर रही है। इससे बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने मजबूरन बम्टा जाना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि घुरला स्कूल में अध्यापकों की तैनाती जल्द से जल्द की जाए।
जल्द भरा जाएगा पद
उप निदेशक प्राथमिक शिक्षा राकेश वशिष्ठ ने बताया कि स्कूल में शीघ्र ही अध्यापकों के पद भरे जाएंगे।