राेहड़ू। सेब के बगीचों में बागवान तौलिये बनाने और खाद डालने का काम शुरू कर रहे हैं। अधिकांश बागवान मिट्टी की जांच के बिना उर्वरकों का प्रयोग करते हैं। बागवानी विशेषज्ञ रासायनिक खादों का कम व अधिक प्रयोग पौधे के लिए नुकसानदायक मान रहे। अच्छी पैदावार के लिए सेब के बगीचों में फरवरी महीने के अंत तक खाद मिलाने काम पूरा किया जाता है। पौषक तत्व का संतुलन बनाए रखना जरूरी है। इसके लिए पौधों में आवश्यकता के अनुसार खादों का प्रयोग करें।
अधिक या कम खादों के प्रयोग से मिट्टी की उर्वरक क्षमता खत्म हो जाती है। जमीन में नमी होने के बाद निचले क्षेत्रों में बागवानों ने तौलिये बनाने के साथ खाद मिलने का काम में शुरू कर दिया है। हर बागवान अनुकूल नमी व अच्छे मौसम के कारण बागवान बगीचे में रखरखाव का काम समय पर निपटाने की कोशिश में रहता है। बागवान जैविक खादों को रासायनिक खादों की तुलना में बेहतर मानते आए हैं। अधिकांश बागवान अपने पुराने अनुभव से उर्वरकों का प्रयोग कर रहे। आधुनिक खेती के लिए बागवानी विशेषज्ञ गलत उर्वरकों का प्रयोग पौधे के लिए नुकसानदायक मानते हैं। बागवानी विशेषज्ञ का कहना है कि बागवान मिट्टी की जांच के बिना खादों का प्रयोग न करें। उद्यान विकास अधिकारी आगरदास का कहना है कि पौधे में भी पोषक तत्व का संतुलन बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने बागवानों को सलाह दी है कि मिट्टी परीक्षण के बाद ही आवश्यकता के अनुसार बगीचों में खादों का प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि खादों का प्रयोग पर्याप्त नमी होने के बाद ही बगीचों में करें। सूखे में एक-दूसरे की देखादेखी में खादों के प्रयोग से पर्याप्त लाभ नहीं मिल सकता।