सांगला (किन्नौर)। सांगला की बास्पा नदी पर बना 300 मेगावाट बिजली प्रोजेेक्ट डैम साइड से नियमों को ताक पर रखकर पानी छोड़ रहा है। इन दिनों एक प्रतिशत भी पानी बाहर नहीं छोड़ा जा रहा है। ऐसे में बास्पा नदी में पल रही विश्व प्रसिद्ध मछलियों के जीवन पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
कुप्पा से कड़छम तक करीब 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले मोनाल, मृग सहित कई अन्य जानवरों को मुश्किल हो रही है। बास्पा नदी के पानी को पन विद्युत परियोजना अपने फायदे के लिए प्रयोग कर नाममात्र बाहर छोड़ रही हैं। नियमों के तहत हर पावर प्रोजेक्ट को डैम साइटों से 15 फीसदी पानी को बाहर छोड़ा जाना जरूरी है। लेकिन कंपनी प्रबंधन पिछले करीब एक माह से पानी नाममात्र छोड़ रहा है। हालांकि क्षेत्र के पर्यावरण प्रेमियों ने कई मर्तबा डैम साइड से अमूमन सर्दियों में 10 प्रतिशत और गर्मियों में 15 प्रतिशत पानी छोड़ने को लेकर कंपनी प्रबंधन से गुहार लगाई थी। लेकिन कंपनी ने इस पर अमल नहीं किया। पर्यावरण संरक्षण समिति के जिला अध्यक्ष एडवोकेट सत्यजीत नेगी, एसटी मोर्चा जिला अध्यक्ष एडवोकेट परविंद्र नेगी, प्रदीप नेगी, विजेंद्र नेगी, कुलदीप नेगी, अनिल नेगी, विश्व नेगी और विद्या लाल नेगी ने कहा कि कंपनी प्रबंधन को इस तरह से नियमों को ताक पर रखकर काम नहीं करना चाहिए। कंपनी प्रबंधन को प्रकृति के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। नेगी ने कहा कि यदि कंपनी प्रबंधन इस बात को गंभीरता से नहीं लेता तो वे इस समस्या को पर्यावरण मंत्रालय के सामने रखेंगे।
नियमों का कर रहे पालन : ज्ञान
हिमाचल बास्पा पावर कंपनी लिमिटेड के हैड ऑफ हाइड्रो ज्ञान बतरा ने कहा कि प्रबंधन सभी नियमों का पालन कर रहा है। लेकिन सर्दियों में पानी का स्तर कम हो जाता हैं। ऐसे में थोड़ी दिक्कतें हो रही हैं। सभी कानून को ध्यान में रखा जाएगा