अमर उजाला ब्यूरो
सांगला (किन्नौर)।
जनजातीय जिला किन्नौर में पथ परिवहन निगम का रिकांगपिओ डिपो लंबे समय से स्टाफ की कमी से जूझ रहा हेै। डिपो में बसों के अलावा कई कर्मचारियों का टोटा है। ऐसे में चालकों और परिचालकों पर अतिरिक्त कार्य का बोझ पड़ रहा है। ऐसे में लंबे रूट पर जाने वाले चालकों को खासी परेशानियां झेलनी पड़ रही है। परिवहन निगम प्रबंधन इन पदों को नहीं भर पा रहा है।
रिकांगपिओ डिपो में बसों, चालकों, परिचालकों, कार्यालय स्टाफ कर्मियों, इंस्पेक्टर, स्टोर कीपर, चौकीदारों सहित सफाई कर्मियों के सैकड़ों पद रिक्त पड़े हैं। सभी कर्मचारियों को तय समय से अधिक काम करना पड़ रहा है। डिपो में कार्यरत कर्मचारियों को अवकाश लेना तक मुश्किल हो रहा है। रिकांगपिओ डिपो में रूटों के मुताबिक 100 बसों की आवश्यकता है। लेकिन वर्तमान में विभिन्न रूटों पर 89 बसें ही दौड़ रही हैं। इसी तरह डिपो में 11 बसें, कार्यालय में हेड मैकेनिक, स्टोर कीपर, लेखापाल, अधीक्षकों की बीते तीन वर्षों से भारी कमी चल रही है। डिपो में नौ इंस्पेक्टर की आवश्यकता है। लेकिन वर्तमान में केवल दो ही इंस्पेक्टर सेवाएं दे रहे हैं। इस डिपो में 132 चालक दिन-रात सेवाएं दे रहे हैं, जबकि इस डिपो में लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर 165 चालकों की जरूरत है और 33 चालकों की बराबर कमी चल रही है। इसी तरह परिचालक भी वर्तमान में 102 ही हैं, जबकि आवश्यकता 160 परिचालकों की है। 58 परिचालकों की कमी चल रही है। इसके अलावा निगम परिसर की रात्रि के समय देखरेख और साफ-सफाई के लिए एक चौकीदार और सफाई कर्मचारी तक की तैनाती नहीं हो पाई है। क्षेत्रीय प्रबंधक रिकांगपिओ प्रेम कश्यप ने भी माना कि चालकों, परिचालकों सहित अन्य स्टाफ की कमी से दिक्कतें पेश आ रही हैं। लेकिन कौशल विकास भत्ते के तहत परिचालकों की सेवाएं ली जा रही है। उधर, शिमला स्थित परिवहन निगम के डीएम कंवर अवतार सिंह ने कहा कि अभी स्टाफ की कमी तो पूरे हिमाचल के डिपुओं में चल रही है। इस बारे में सरकार को कई बार लिखित पत्र के माध्यम से अवगत करवाया गया है। सरकार की ओर से नई भर्तियां करवाने के बाद ही समस्या दूर होगी।