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मिड डे मील वर्करों को मिले 6330 न्यूनतम वेतन

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अमर उजाला ब्यूरो
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ब्रौ (रामपुर बुशहर)।
सीटू क्षेत्रीय कमेटी सचिव कुलदीप और राम दास ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने सत्ता में आने के बाद बजट में कटौती कर मिड डे मील को अपंग करने का काम किया है। देश में 12-13 साल से मिड डे मील वर्कर्स अपनी इच्छाओं को दबाकर देश के भविष्य बच्चों को खाना बनाकर सेवा कर रहे हैं, परंतु इनको 13 वर्ष के बाद भी मात्र 1500 रुपये वेतन में कार्य करना पड़ रहा है, जो साल में सिर्फ 10 माह में मिलता है। केंद्र सरकार ने 2009 के बाद अभी तक इनके वेतन में बढ़ोतरी नहीं की है। देश में मोदी सरकार ने सत्ता में आने पर अच्छे दिन का वादा किया था, लेकिन सत्ता में आने के 3 वर्ष बाद भी 45वें श्रम सम्मेलन की सिफारिशों को लागू नहीं किया गया है। इसके तहत सभी योजना कर्मियों को मजदूरों की श्रेणी में लाने, न्यूनतम वेतन देने, मेडिकल और पेंशन सुविधा देने की सिफारिशें आज दिन तक लागू नहीं हो पाई हैं। प्रदेश की सरकारों का भी मिड डे मील वर्कर्स के प्रति कोई सकारात्मक रुख नहीं रहा। छह घंटे काम कराने के बाद सरकार न्यूनतम वेतन लागू नहीं कर रही। मात्र 500 रुपये की बढ़ोतरी पिछली सरकार ने वेतन में की थी। इसके अलावा निरमंड ब्लॉक में मिड डे मील वर्करों को समय पर वेतन नहीं दिया जा रहा। अभी भी वर्करों को 2 माह के वेतन की अदायगी नहीं हो पाई है। वर्करों ने 6330 रुपये न्यूनतम वेतन देने, 25 वर्ष की शर्त को हटाकर प्रत्येक स्कूल में दो मिड डे मील वर्कर नियुक्त करने, वर्करों को छुट्टी देने, 10 महीने के बजाय 12 महीने का वेतन देने और योजना को ठेके पर न देने जैसी मांगें उठाई हैं। इन्हीं मांगों को लेकर मिड डे मील वर्कर आगामी 17 जनवरी को हड़ताल पर रहेंगे। 17 जनवरी को वर्कर रामपुर में रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। मिड डे मील वर्कर्स यूनियन खंड इकाई निरमंड की बैठक वीरवार को निरमंड में हुई। इस दौरान क्षेत्र निरमंड खंड के तहत विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे वर्करों ने इस बैठक में अपनी मौजूदगी दर्ज करवाई। इस अवसर पर रोशन लाल, कला देवी, कीमत राम, सुमित्रा देवी, बेली राम, श्याम लाल, प्यारे लाल, पिंगला देवी, सलाबू, सावित्रा, तीर्थ वर्मा सहित कई अन्य मौजूद रहे।
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