अमर उजाला ब्यूरो
नेरवा (रोहड़ू)। राजकीय प्राथमिक स्कूल थूंदराड़ा में 55 छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। स्कूल भवन के दो कमरों में छात्रों की कक्षाएं चलती थीं। साढ़े चार दशक से थूंदराड़ा में स्कूल चल रहा है। स्कूल में थूंदराड़ गांव सहित कोठी गांव से भी बच्चे शिक्षा ग्रहण करने आते हैं। लेकिन, अब स्कूल भवन जल जाने के बाद छात्रों के अभिभावकों को अपने बच्चों के भविष्य की चिंता सताने लगी है। बच्चों को पढ़ाने के लिए गांव के समीप कोई भी स्कूल नहीं है। थूंदराड़ा और कोठी गांव के जो स्कूल सबसे समीप है, वह तीन किलोमीटर की चढ़ाई पर मालत में है। ऐसे में छोटे बच्चों का खड़ी चढ़ाई चढ़ कर रोजाना पैदल स्कूल पहुंचना संभव नहीं है। 16 फरवरी से शिक्षा का नया सत्र शुरू होने वाला है। स्कूल प्रबंधन समिति भी मामले को लेकर चिंता में है। अभिभावकों की निगाहें अब सरकार और शिक्षा विभाग पर है। स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष राजेंद्र दीपटा, अभिभावक मस्त राम, जीत सिंह, प्रताप सिंह, मस्त राम, जगत राम, देई राम, प्रताप मांटा, कीमा राम और वीरेंद्र मांटा ने बताया कि स्कूल भवन जल जाने के बाद छात्रों की पढ़ाने के लिए कोई स्थान नहीं है। मालत स्कूल में जाना छोटे बच्चों के लिए मुश्किल है। ऐसे में उन्होंने शिक्षा मंत्री से आग्रह किया है कि स्कूल भवन का निर्माण शीघ्र करवाया जाए। स्कूल निर्माण होने तक छात्रों की पढ़ाई के लिए उचित व्यवस्था की जाए।