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Rampur Bushahar News: आनी खंड के 18 स्कूल हो चुके बंद, दस पर बंद होने की लटकी तलवार

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शिव राम ठाकुर
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प्राथमिक विद्यालयों में घटती बच्चों की संख्या पर चिंता, शिक्षाविदों ने दिए अहम सुझाव
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हरिकृष्ण शर्मा

आनी (कुल्लू)। आनी खंड की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था इन दिनों गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। कभी 115 प्राइमरी स्कूलों वाले इस क्षेत्र में अब तक 18 स्कूलों को बंद करना पड़ा है, क्योंकि इनमें छात्रों की संख्या शून्य हो गई थी। इसके अलावा 10 ऐसे विद्यालय हैं, जहां बच्चों की संख्या पांच या उससे कम रह गई है। इन स्कूलों को भी बंद करने के आने वाले समय में फरमान आ सकते हैं। गौर हो कि शिक्षा खंड आनी के प्राथमिक स्कूलों में घटती विद्यार्थियों की संख्या चिंता का विषय बनी हुई है। बीते वर्ष क्षेत्र के 18 स्कूलों को बच्चों की कम संख्या के चलते बंद किया गया, जबकि अब दस स्कूलों पर भी बंद होने की तलवार लटक गई है। विद्यार्थियों की लगातार घटती संख्या को लेकर क्षेत्र के शिक्षाविदों ने अपनी गहरी चिंता जताते हुए समाधान भी सुझाए हैं।
केंद्र स्तर पर उच्च गुणवत्ता वाले स्कूल बनें
सेवानिवृत्त शिक्षक डॉ. विनोद आचार्य ने कहा कि जब तक किसी विद्यालय में पर्याप्त संख्या में छात्र नहीं होंगे, तब तक वहां गुणवत्तापूर्ण शिक्षण वातावरण बन पाना मुश्किल है। सरकार को केंद्र स्तर पर उच्च गुणवत्ता वाले स्कूल बनाने चाहिए। इसके लिए क्षेत्र के विभिन्न गांवों से बच्चों को लाने के लिए परिवहन सुविधा उपलब्ध करवाई जानी चाहिए। साथ ही जहां सड़कें नहीं हैं, वहां विशेष इंतजाम किए जाने चाहिए, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। शिक्षकों को समय के अनुसार प्रशिक्षित किया जाना चाहिए और सरकार को किसी भी नई योजना को लागू करने से पहले अच्छी तरह से जांच परख करनी चाहिए। उनका जोर इस बात पर था कि केंद्र विद्यालयों में सभी आवश्यक सुविधाएं हों, ताकि छात्रों को एक समृद्ध शैक्षणिक वातावरण मिल सके।
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प्री. प्राइमरी शिक्षा का होना जरूरी
पूर्व जिला उपनिदेशक शिवराम ठाकुर ने कहा कि प्राथमिक स्कूलों में प्री. प्राइमरी शिक्षा का होना बहुत जरूरी है, ताकि बच्चे शुरू से ही शिक्षा के साथ जुड़ सकें। यह सुविधाएं निजी स्कूलों में है। निजी स्कूलों में एक बार जब बच्चे को छोड़ देते हैं, तो वहां से सरकारी स्कूलों में लाना मुश्किल है। अभिभावकों को भी विद्यालय की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए, जो वर्तमान समय में न के बराबर है। शिक्षकों की ट्रेनिंग नई शिक्षा नीतियों और तकनीकी बदलावों के अनुरूप होनी चाहिए और स्कूलों में मूलभूत विषयों के साथ स्टाफ की पूरी व्यवस्था होनी चाहिए।

अभिभावकों की सहभागिता अत्यंत आवश्यक
राज्य पुरस्कार से सम्मानित पीएमश्री विद्यालय आनी के प्रधानाचार्य अमर चौहान ने कहा कि अभिभावकों की विद्यालयों के साथ सहभागिता अत्यंत आवश्यक है। शिक्षकों की ट्रेनिंग समय समय पर होनी चाहिए और खाली पदों को शीघ्र भरा जाना चाहिए, ताकि शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार हो सके।
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मजबूत हो आधारभूत शिक्षा का ढांचा
शिक्षा क्षेत्र में गोल्ड मेडलिस्ट डॉ. मुकेश शर्मा ने कहा कि आधारभूत शिक्षा का ढांचा मजबूत होना आवश्यक है। स्कूलों में खेल शिक्षक, खेलकूद गतिविधियां और रचनात्मक कार्यक्रम अनिवार्य रूप से होने चाहिए। इन सुविधाओं से बच्चों का सर्वांगीण विकास संभव है। साथ ही, शिक्षकों को अपनी जिम्मेदारियों के प्रति गंभीर और समर्पित होना चाहिए। सरकार को शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर ध्यान देना चाहिए न कि स्कूलों को बंद करने पर। इससे देश का भविष्य उज्ज्वल हो।
संवाद

शिव राम ठाकुर

शिव राम ठाकुर

शिव राम ठाकुर

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