रामपुर बुशहर। राज्य में भले ही लॉटरी पर सरकार ने पूरी तरह से रोक लगा रखी है। बावजूद इसके रामपुर में लॉटरी के नाम पर मोटी धनराशि ऐंठ कर लोगों को चूना लगाया गया है। रविवार को रामपुर के एक निजी होटल की छत पर हर माह की तरह वर्ष के अंतिम माह में लॉटरी का ड्रा निकाला गया। जब लोगों को पता चला कि उनसे वसूली गई राशि के बराबर का सामान तक नहीं दिया जा रहा तो हंगामा हो गया।
लोगों को जब मालूम हुआ कि कार, स्कूटी, एलईडी, फ्रिज, मोटरसाइकिल के ड्रा निकालकर लोगों को दे दिए गए हैं और अन्य लोगों से वसूली गई पूरी राशि ब्याज सहित नहीं दी जा रही तो मामला और गरमा गया। लोगों ने कहा कि जब उनसे सालभर में 8700 सौ रुपये वसूले गए हैं तो फिर उन्हें पूरे पैसे क्यों नहीं लौटाए जा रहे। कई लोग इसलिए भी अड़े हुए थे कि जितनी राशि उनसे ली गई है, उतने का सामान प्रत्येक सदस्य को दिया जाए।
यह है मामला
दरअसल मंडी के गोहर की एक कंपनी रामपुर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में अपने एजेंटों के माध्यम से सदस्य बनाती रही। प्रत्येक सदस्य से प्रतिमाह 700 रुपये वसूले जाते रहे और दिसंबर की किश्त 1000 रुपये की ली गई। कई लोगों ने कंपनी में एक साथ चार-चार लॉटरियां ले रखी हैं। रविवार को कंपनी ने सभी सदस्यों को ड्रॉ के लिए बुलाया। इस दौरान स्कूटियां, मोटरसाइकिल, एलईडी, फ्रिज और माइक्रोवेव ओवन भी लॉटरी के माध्यम से निकाले। स्कूटी और मोटरसाइकिल की कीमत 50-50 हजार रुपये थी, जबकि माइक्रोवेव ओवन की कीमत 5490 रुपये थी। बताते हैं कि कुछ माह पहले ड्रा से कार निकालकर एक सदस्य को दे दी गई थी। आज स्कूटी, मोटरसाइकिलों और माइक्रोवेव का ड्रॉ निकाला गया था। इसके अलावा करीब 100 उपभोक्ताओं को मोबाइल फोन ड्रॉ से दिए जाने थे, जिनकी कीमत 3000 रुपये प्रति मोबाइल बताई जा रही है।
क्या कहते हैं लोग
लॉटरी में पैसा लगाने वाले ननखड़ी के रंजीत सिंह रवि, चूहाबाग के प्रताप ने बताया कि उन्होंने नियति मेहता के नाम से लॉटरी में पैसा लगाया और कंपनी को 8700 रुपये का भुगतान किया। अब जब वह ड्रॉ के समय पहुंचे तो पता चला कि उनको पूरे पैसे का सामान तक नहीं दिया जा रहा। कंपनी ने 1500 लोगों से 8700 रुपये प्रति लॉटरी लिया है। ड्रा में निकाले जा रहे माइक्रोवेव की कीमत 5490 रुपये है। इसी तरह से मोबाइल की कीमत 3000 रुपये से अधिक नहीं है। ऐसे में अगर कंपनी माइक्रोवेव या मोबाइल देती है तो उनसे वसूली गई मूल राशि तक नहीं लौटाई जा रही, जबकि एक साल तक पैसा कंपनी के पास रहा है। कंपनी को मूल और ब्याज सहित राशि के बराबर का सामान तो प्रत्येक सदस्य को देना चाहिए। कल्याणपुर के दीपेश महाजन ने कहा कि उसने चार लॉटरियां शुरू की थीं और उसे यहां आकर पता चला कि पूरे पैसे वापस नहीं किए जा रहे।
वहीं, कंपनी के सलाहकार तिलक ने कहा कि कंपनी की बैठकें नियमित रूप से होती रही हैं और इसमें सदस्यों को बुलाया जाता था। ये सदस्य नियमित बैठकों में नहीं आए और कंपनी के लिए गए कई फैसलों से अवगत नहीं हो पाए। कंपनी ने पहले ही शर्त रखी थी कि सदस्यों से धनराशि जमा की जाएगी और उसके बदले सामान दिया जाएगा।