सड़क निर्माण को लेकर बरती अनियमितताएं
कोटखाई (रोहड़ू)। सेब बाहुल्य क्षेत्र की लाइफ लाइन ठियोग-हाटकोटी सड़क निर्माण के दौरान भरती गई अनियमितताओं का खामियाजा क्षेत्र के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। सड़क निर्माण का जिम्मा सरकार ने एक निजी कंपनी को दिया था लेकिन कंपनी ने भूमि कटान से लेकर पुलों के निर्माण और ढंगों तक के कार्य ठेकेदारों को सबलेट कर दिया। जिसके कारण सड़क की गुणवत्ता पर कई सवालिया निशान लगे। सड़क निर्माण के दौरान ‘अमर उजाला’ ने भी कई बार मामले को प्रमुखता से उठाया। बावजूद इसके संबंधित विभागों के अधिकारी व तत्कालीन सरकार के प्रतिनिधियों ने सड़क निर्माण में बरती जा रही अनियमितताओं की कोई सुध नहीं ली। जिसका परिणाम आज सेब बाहुल्य क्षेत्र के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। गुणवत्ता पर बार-बार सवालिया निशान उठने पर मौजूदा सरकार ने कंपनी को ट्रमिनेट करके 20 करोड़ रुपये का जुर्माना तो लगा दिया लेकिन सड़क निर्माण में भरती गई अनियमितताओं के लिए जिम्मेवार अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई।
सड़क निर्माण के दौरान भूमि कटान के लिए ठेकेदारों ने नियमों को ताक पर रखकर अपने निजी हितों के लिए विस्फोटकों का इस्तेमाल किया। अवैज्ञानिक रुप से पहाड़ों का कटान किया गया। जिससे पहाड़ियों का दरकना शुरू हो गया है। मलबेे को जंगलों और नालों में डंप किया गया। अब तक 20 से अधिक डंगे गिरे चुके हैं। जिससे सरकार को तीन करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।
प्रदेश सरकार के मुख्य सचेतक नरेंद्र बरागटा ने बताया कि सड़क निर्माण के दौरान गुणवत्ता को पुरी तरह से नजरअंदाज किया गया। कांग्रेस सरकार में चहेते ठेकेदारों को काम दिया गया। ठेकेदारों ने अवैज्ञानिक रुप से भूमि का कटान किया। जिस कारण पट्टी ढांक में पूरी पहाड़ी खिसक गई है। कई स्थानों पर मलबे के ढेरों पर डंगे लगाए गए। जिस कारण सड़क पर 20 से अधिक दीवारें गिर गई हैं। जिसे सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। अगर समय रहते सड़क निर्माण की गुणवत्ता का ध्यान रखता होता तो आज लोगों को इतनी परेशानियां नहीं झेलनी पड़ती। सड़क निर्माण में भरती गई अनियमितताओं की जांच करवाई जाएगी।
स्टेट रोड प्रोजेक्ट के अधिशासी अभियंता आरस जस्वाल ने माना कि सड़क पर लगाए गए कई डंगे गिर गए हैं।