अमर उजाला ब्यूरो।
रोहडू। सेब बगीचों में तेजी से फैल रही सुंडी ने फलों को भारी नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया है। इस साल तीन माह में दूसरी बार हेलिकोवर्पा सुंडी ने सेब के फलों पर हमला शुरू कर दिया है। जमीन में घास से तैयार होकर पौधों में लगने वाली सुंडी के हमले से बागवान परेशान हैं।
सेब बगीचों में बीते करीब दो सप्ताह से सुंडी कर प्रकोप तेजी से फैल रहा है। सुंडियां जमीन पर चौडे़ पत्ते वाले घास से तैयार हो रही हैं। उसके बाद सेब के तनों से चढ़ कर फलों को छेद कर नुकसान पहुंचा रही हैं। अधिक गर्मी होने के कारण बागवान इसकी रोकथाम के लिए कीटनाशक का स्प्रे करने से कतरा रहे हैं। अधिक तापमान में कीटनाशक का स्प्रे करने से सेब बगीचों में माईट के संक्रमण का खतरा बना रहता है। क्षेत्र के बागवान लगातार सुंडी के बढ़ते प्रकोप से परेशान हैं। इसकी रोकथाम के लिए बागवानी विशेषज्ञ से भी लगातार संपर्क कर रहे हैं। बागवानों का कहना है कि कई टहनियों में फलों को बीस प्रतिशत फलों को नुकसान पहुंच चुका है। इस साल पहले अप्रैल में सेब के फलों को सुंडियों ने भारी नुकसान पहुंचाया था। उस समय इसकी रोकथाम के लिए कीटनाशक का स्प्रे करके काबू किया गया था। अब दोबारा सुंडी ने हमला शुरू कर दिया है।
कृषि विज्ञान केंद्र रोहडू के प्रभारी एवं बागवानी विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र कायथ का कहना है कि मध्यम ऊंचाई तक सेब के बगीचों में हेलिकोवर्पा सुंडी के तेजी से फैलने की सूचना मिल रही है। उन्होंने बागवानों को सलाह दी है कि इसकी रोकथाम के लिए सेब के पौधों में दो सौ एमएल मैलाथान दो सौ लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करें। उन्होंने कहा कि इसका जीवन चक्र वसंत से शरद ऋतु तक करीब तीन महीने लगातार रहता है। इसलिए समय पर इसकी रोकथाम जरूरी है। समय पर रोका नहीं गया तो अन्य फसलों को भी नुकसान पहुंचाती है।