रामपुर बुशहर। रामपुर नगर परिषद ठेका मजदूर यूनियन संबंधित सीटू के बैनर तले मिनी सचिवालय से एमसी कार्यालय तक मजदूरों ने हल्ला बोला। शिमला के सीटू जिला उपाध्यक्ष कुलदीप और आशु भारती ने कहा है कि रामपुर नगर परिषद के अधीन काम कर रहे ठेका मजदूरों का शोषण किया जा रहा है। इन मजदूरों को हिमाचल सरकार की ओर से निर्धारित न्यूनतम वेतन अभी तक नहीं मिल पा रहा है। प्रदेश सरकार की ओर से इसको लागू करने के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं किए गए हैं, जिससे ठेकेदार को मजदूरों को लूटने की खुली छूट मिली है। सोमवार को रैली निकालकर मजदूरों ने नगर परिषद के खिलाफ मोर्चा खोला।
सीटू ने कहा कि एक अप्रैल 2018 से वेतन प्रदेश सरकार ने 225 रुपये निर्धारित किया है। रामपुर नगर परिषद के अधान काम कर रहे मजदूरों को मई 2019 में भी वेतन 210 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मिल रहा है। जबकि, अब हिमाचल सरकार का नया वेतन 250 रुपये हो गया है। इससे लगता है कि नगर परिषद प्रशासन और ठेकेदार की मिलिभगत से मजदूरों की लूट हो रही है, जिसके लिए प्रदेश सरकार और श्रम विभाग जिम्मेदार है। एमसी में काम कर रहे मजदूरों को पहनने के लिए कोई वर्दी प्रबंधन की तरफ से नहीं दी गई है। इन मजदूरों को रविवार की छुट्टी के अलावा कोई छुट्टी नहीं मिलती है। राष्ट्रीय छुट्टी 26 जनवरी, 15 अगस्त, 2 अक्तूबर की छुट्टी भी इन मजदूरों को नहीं मिल रही है। कानून के दायरे के अंदर मिलने वाली सिक लीव, कैजुअल लीव, फेस्टिवल हॉलिडे तो दूर की बात है इन मजदूरों के ईपीएफ का कोई रिकॉर्ड नहीं है। ईपीएफ का पैसा तो कट रहा है, लेकिन खाते में जमा हो रहा है या नहीं? यह अभी तक मजदूरों को मालूम नहीं है।
यूनियन के सचिव ललित ने कहा है कि श्रम विभाग और नगर परिषद प्रशासन श्रम कानूनों को लागू करने के लिए आनाकानी कर रहा है। कहा कि नगर परिषद ने पिछला एरियर और न्यूनतम वेतन लागू नहीं किया तो आंदोलन को सीटू के साथ मिलकर उग्र किया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी श्रम विभाग और नगर परिषद प्रशासन की होगी। इस मौके पर देवकी नंदन, अविनाश, साहिल, मंजू, मनित, सुशीला, रजनी, रेशमी, मीना, समानिया, शारदा, चिंता, फूलवती, राजन, नीमू और सरसा सुनामनी आदि उपस्थित रहे।