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आढ़तियों के खिलाफ केस दर्ज करे पुलिस

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अमर उजाला ब्यूरो

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रोहड़ू। बागवानों से खरीद के बाद सेब के दाम का भुगतान न करने वालों के खिलाफ किसान संघर्ष समिति ने मोर्चा खोल दिया है। समिति ने सरकार से पुलिस में मामले दर्ज करवाने की मांग उठाई है। इसी मुद्दे को लेकर आयोजित बैठक के दौरान तय किया गया कि 22 अप्रैल को बागवानों-किसानों की समस्याओं को लेकर शिमला में एपीएमसी कार्यालय के बाहर धरना दिया जाएगा।

किसान संघर्ष समिति की बैठक मंगलवार को रोहडू में आयोजित की गई। इस मौके पर समिति के सचिव संजय चौहान विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक में 12 पंचायतों के बागवानों ने भाग लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि आढ़ती सेब की मंडियों में बागवानों से बीस से तीस रुपये प्रति पेटी सेब अवैध वसूली करते रहे हैं। मामले के कई बार बागवानों की ओर से उठाया गया लेकिन अभी तक इस मामले को लेकर सरकार गंभीर नहीं है। सरकार इस मामले में कड़ा कानून बनाए। कानून का उल्लंघन करने वाले आढ़तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
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बैठक में उन्होंने तय किया कि 22 अप्रैल को शिमला में आयोजित होने वाले प्रदर्शन के लिए क्षेत्र के सैकड़ों बागवान पहुंचेंगे। यदि सरकार इस मामले को सेब सीजन से पहले गंभीरता से नहीं लेती तो किसान संघर्ष समिति को अगला कदम उठाना पड़ सकता है।

बैठक के दौरान किसान संघर्ष समिति की एक 18 सदस्यों की कमेटी का चयन किया गया। इसमें सुखदेव चौहान को संयोजक और बीर सिंह ठाकुर को सह संयोजक चुना गया। दलबीर, विद्या नंद, प्रमोद, प्रीतम जीशान लाल, सुरेश नेगी, जानकी दास, मेघराज, दिलीप, प्रेम चंद, कुलदीप तेगटा, रोशन लाल, राजू नेगी, वरिंद्र दिवानटा, अजीत, शर्मा, भूमि देव को कमेटी सदस्य बनाया गया।
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बैठक में किसानों और बागवानों की समस्याओं पर चर्चा की गई। बागवानों ने चर्चा में कहा कि रोहड़ू में सैकड़ों बागवानों के करोड़ों रुपये आढ़तियों के पास बकाया है। अब दूसरा सेब सीजन आने वाला है अभी तक आढ़ती बागवानों के सेब का भुगतान करने में आनाकानी कर रहे हैं। बैठक में निर्णय लिया गया कि दोषी आढ़तियों के विरुद्ध शीघ्र कड़ी कार्रवाई की जाए। बैठक में तय किया गया कि बागवानों का संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक कि मंडियों में एपीएमसी कानून को लागू कर बागवानों का शोषण नहीं रोकती।

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