रोहड़ू। आदर्श आचार संहिता में चुनाव आयोग की स्वीकृति के बिना ही चांशल घाटी में ठेकेदारों की मशीनें बर्फ कटान में जुट गई हैं। बर्फ हटाने के कोई भी टेंडर लोनिवि विभाग की ओर से नहीं लगाए गए हैं। मौके पर विभाग के अधिकारी भी बर्फ हटाने के कार्य की देखरेख कर रहे हैं। बर्फ हटाने में विभाग लाखों रुपये खर्च करता है। कई बार बर्फ कटान के नाम पर घोटाले भी उजागर हो चुके हैं। अब एक बार फिर से बर्फ कटान में बिना स्वीकृति लगी मशीनों से गड़बड़झाले की बू आना शुरू हो गई है। हालांकि मामला उजागर होते ही लोक निर्माण विभाग अधिकारियों ने अपने हाथ पीछे खींचने शुरू कर दिए हैं।
आचार संहिता में किसी भी काम को शुरू करने के लिए पहले चुनाव आयोग की स्वीकृति लेना अनिवार्य होता है। लोक निर्माण विभाग क्वार मंडल ने बर्फ हटाने का कार्य ठेकेदारों की मशीनों से करवाने की चुनाव आयोग से स्वीकृति मांगी है। लेकिन अभी तक चुनाव आयोग द्वारा विभाग को इस संदर्भ में कोई भी स्वीकृति नहीं दी गई है। बावजूद इसके चांशल घाटी पर रसूखदार ठेकेदारों की निजी मशीनें दिन-रात बर्फ हटाने का कार्य कर रही हैं। लोनिवि की मशीनें भी बर्फ हटाने के कार्य में पहले से जुटी हुई हैं। चांशल घाटी से डोडरा तक करीब 30 किलोमीटर क्षेत्र में बर्फ हटाने के लिए विभाग लाखों रुपये खर्च करता है। पहले भी बर्फ कटान के नाम पर लाखों रुपये के घोटाले सामने आए हैं। अब सवाल उठता है कि चुनाव आयोग की स्वीकृति के बिना रसूखदार ठेकेदारों की मशीनें बर्फ हटाने के कार्य में कैसे लगी। पुख्ता सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार लोनिवि के अधिकारी भी दिन भर खड़े रहते हैं।
लोक निर्माण विभाग क्वार मंडल के सहायक अभियंता दशमेंद्र पाल ने बताया कि हमने किसी भी ठेकेदार की मशीनें बर्फ कटान में नहीं लगाई हैं। अगर कोई ठेकेदार बर्फ हटाने का कार्य कर रहा है तो वह अपनी मर्जी से कर रहा है।
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता पवन कुमार गर्ग ने माना कि अभी उन्हें चुनाव आयोग से बर्फ हटाने में निजी मशीनें लगाने की स्वीकृति नहीं मिली है। उन्होंने बताया कि लोनिवि की मशीनें बर्फ हटाने का कार्य कर रही हैं। अगर किसी ठेकेदार ने अपनी मशीन बर्फ हटाने के कार्य में लगाई है तो उसे रोक दिया जाएगा।
एसडीएम रोहड़ू एवं निवार्चन अधिकारी बीआर शर्मा ने बताया कि इस संदर्भ में लोक निर्माण विभाग ने स्वीकृति मांगी है। जिसे चुनाव आयोग को भेजा गया है। अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है।