तीन फीट बर्फबारी में 11 किलोमीटर
पैदल सफर करने को मजबूर ग्रामीण
रक्षम से छितकुल तक सड़क बहाल न होने के कारण लोगों में रोष
सड़क बहाली में जुटी मशीन दो घंटे काम करने बाद हुई खराब
धर्मेंद्र बोज्ञाटो
छितकुल (किन्नौर)। सांगला तहसील के अंतिम पंचायत छितकुल और वहां पर तैनात मस्तरंग और नगस्ती में आईटीबीपी कैंप में भारी बर्फबारी हुई है। लोक निर्माण विभाग ने सांगला से रक्षम तक तो सड़क खोल दी है, लेकिन रक्षम से छितकुल तक 11 किलोमीटर सड़क अभी तक बहाल न होने से लोगों को स्वयं तीन फीट बर्फबारी में पैदल रास्ता बना कर 11 किलोमीटर दूर अपने गंतव्य पहुंचना पड़ रहा है।
रक्षम में सोमवार को मशीन खराब होने से सड़क बहाली का काम ठप पड़ा हुआ है। छितकुल गांव आखिरी गांव होने के कारण वहां पर स्वास्थ्य सुविधा बेहतरीन न होने पर लोगों को रामपुर और रिकांगपिओ पहुंचना पड़ता है। वहीं इस गांव से प्रदेश सरकार और केेंद्र सरकार में कई कर्मचारी कार्यरत होने के कारण उन्हें घर से वापस आने मेें मुश्किलें आ रही हैं। छितकुल से रक्षम तक रास्ता बंद होने पर सोमवार को छितकुल में फंसे सरकारी कर्मचारी और स्कूल-कॉलेजों में पड़ने वाले छात्र जान जोखिम में डाल कर रास्ता बनाते हुए 11 किलोमीटर दूर रक्षम तक पहुंचे। छितकुल से रक्षम तक पैदल सफर करने वाले लोगों में छितकुल पंचायत की प्रधान राजकुमारी, सीआरपीएफ के जवान लोकेंद्र नेगी, आईटीबीपी के जवान भारत भूषण, पशुपालन विभाग के कर्मचारी कमलानंद, पंचायत सचिव चमन नेगी, जसविंद्र नेगी, रमेश नेगी सहित छात्रों में विनोद, निशांत, रितेश और इशा ने बताया कि सड़क बहाल न होने कारण उन्हें जान जोखिम में डालकर 11 किलोमीटर स्वयं रास्ता बनाते हुए रक्षम तक आना पड़ा। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की है जल्द उक्त सड़क को खोलने के लिए दो मशीनों का प्रबंध किया जाए।
छितकुल पंचायत की प्रधान राजकुमारी के अनुसार लोक निर्माण विभाग रक्षम से छितकुल तक सड़क बहाल करने में कोई पहल नहीं कर रहा है। मात्र दो घंटे काम करने बाद मशीन खराब हो गई। विभाग का सुस्त रवैया ग्रामीणों पर भारी पड़ रहा है। वहीं लोक निर्माण विभाग भावानगर के अधिशासी अभियंता आरएल चौहान ने बताया कि भारी बर्फबारी के चलते कई जगह सड़क बंद होने से परेशानियां पेश आ रही हैं। रक्षम में खराब मशीन को बदल कर दूसरी मशीन सड़क बहाली के लिए लगाई जाएगी।
छितकुल पंचायत प्रधान राजकुमारी ने बताया कि छितकुल के नजदीक मस्तरंग आईटीबीपी कैंप से आए जवानों ने भी पैदल चलने के लिए रास्ता बनाने में सहयोग दिया, जिसके लिए पंचायत और ग्रामीणों ने आईटीबीपी के जवानों का आभार जताया है।