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समय रहते नहीं सुलझी समस्याएं तो जाएंगे कोर्ट

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अमर उजाला ब्यूरो

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रामपुर बुशहर। रामपुर के राजपुरा स्थित 9.9 मेगावाट राजपुरा हाइड्रो परियोजना के वर्षों से प्रभावित रोजगार और मुआवजे का इंतजार कर रहे हैं। प्रभावितों ने प्रधान सचिव ऊर्जा निदेशालय से प्रभावितों की समस्याओं को समय रहते सुलझाने की मांग की है। उन्होंने चेताया कि यदि जल्द ही समस्याओं का समाधान नहीं होता तो प्रभावित कोर्ट जाने के लिए विवश हो जाएंगे। परियोजना प्रभावित समस्याओं को लेकर जल्द ही राज्यपाल और मुख्यमंत्री से भी मिलेंगे।
वर्ष 2011 में राजपुरा हाइड्रो परियोजना का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। इस परियोजना के लिए तकलेच और भड़ावली पंचायत के एक दर्जन से अधिक ग्रामीणों ने अपनी जमीनें दी थीं, बदले में परियोजना प्रबंधन ने इन प्रभावितों को 40 वर्ष के स्थायी रोजगार मुहैया करवाने का करारनामा दर्ज किया था, लेकिन तीन वर्ष बाद परियोजना का निर्माण कार्य ठप हो गया और परियोजना प्रभावित लोगों को अपने रोजगार से हाथ गंवाना पड़ा था। वहीं अब परियोजना का कार्य फिर से शुरू हो रहा है, लेकिन परियोजना लेने वाले नई कंपनी ग्रामीणों के हकों से खिलवाड़ कर रही है और प्रभावितों के हितों को दरकिनार कर परियोजना कार्य शुरू कर रही है। ऐसे में परियोजना प्रभावित और प्रभावित पंचायतों के जनप्रतिनिधियों में परियोजना की कार्यप्रणाली को लेकर खासा रोष है।
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परियोजना प्रभावित जवाहर लाल कायथ, प्यारे लाल कायथ, जगदीश, ईश्वर दास, मोहन सिंह, शेर सिंह, देविंद्र सिंह, सुरेखा देवी, नरोतम दासी सहित प्रभावितों ने प्रधान सचिव प्रबोध सक्सेना से परियोजना में रोजगार मुहैया करवाने और प्रभावितों को मुआवजा जारी करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि करारनामे के बाद भी परियोजना में प्रभावितों को रोजगार नहीं दिया जा रहा। यदि समस्या समय रहते हल नहीं होती तो वे कोर्ट का दरवाजा खटखटाने को मजबूर होंगे।
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वहीं इस संबंध में प्रधान सचिव ऊर्जा निदेशालय प्रबोध सक्सेना ने कहा कि राजपुरा हाईड्रो परियोजना प्रभावितों की शिकायत उन्हें मिली है। मामले को ऊर्जा निदेशक के समक्ष रखा जाएगा। इसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है।

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