एक माह तक प्रतिबंधित करेंगे धार्मिक कार्य
मकर संक्रांति के दिन से देवी-देवता की विदाई हो जाती है शुरू
इंद्र देव की सभा में हाजिरी लगाकर धरती पर लौटेंगे देवी-देवता
अमर उजाला ब्यूरो
रोहड़ू। सोमवार को पोष माह की समाप्ति के साथ और मकर संक्रांति के दिन देवी देवता एक माह के स्वर्ग प्रवास पर जाना शुरू हो गए हैं। सोमवार को क्षेत्र के मंदिरों में पूजा-अर्चना के कार्य के बाद देवी-देवताओं को विदाई दी गई। अब एक माह तक मंदिरों में धार्मिक कार्य प्रतिबंधित रहेंगे।
मान्यता के अनुसार हर वर्ष मकर संक्रांति को देवी-देवता स्वर्ग प्रवास पर जाना आरंभ कर देते हैं। इंद्र देव की सभा में हाजिरी लगाकर देवी-देवता एक माह के बाद धरती पर लौटेंगे तथा अपने गूरों के माध्यम से पूरे साल घटित होने वाली घटना की भविष्यवाणी करेंगे। इंद्र देव की सभा के दौरान देवी-देवता अपने-अपने क्षेत्रों व गांव के लिए आशीर्वाद लेकर आएंगे। इस दौरान एक माह तक मंदिरों में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित नहीं होंगे। सोमवार को संक्रांति पर्व पर मंदिरों में पूजा अर्चना आयोजित की गई। ग्रामीण ने अपने-अपने गांव में स्थित मंदिरों में हलवा, पूरी व अन्य मिष्ठान बनाकर देवी-देवताओं को भोग लगाया।
शिव शक्ति धाम मंदिर के संस्थापक पंडित ज्योति पाल ने बताया कि क्षेत्र में मकर संक्रांति पर देवी-देवताओं के स्वर्ग प्रवास पर जाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। संक्रांति के दिन से ही देवी-देवताओं का स्वर्ग प्रवास पर जाना आरंभ हो गया है। अब एक माह बाद ही वे वापस लौटेंगे। मंदिरों में पूजा-अर्चना तो की जाएगी लेकिन विशेष रुप से आयोजित होने वाले पारंपरिक धार्मिक कार्य अब एक माह के बाद ही आयोजित किए जाएंगे।