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सामाजिक कुरीतियों को दूर करने के लिए खुद आगे आएं महिलाएं

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अमर उजाला ब्यूरो

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रोहड़ू। अमर उजाला के अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्स कार्यक्रम में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ पर जोर दिया गया। चिड़गांव में हुए कार्यक्रम के दौरान इस बात पर बल दिया गया कि जब बेटियां शिक्षित होंगी, वो तभी अपने अधिकारों को लेकर जागरूक होंगी और अपने ऊपर होने वाले अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठा सकेंगी। एसडीएम रोहड़ू बीआर शर्मा ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि कई सामाजिक प्रथाएं आज भी समाज में प्रचलित हैं, जिनके कारण महिलाओं को बराबर सम्मान नहीं मिल रहा है। इन कुरीतियों को दूर करने की जरूरत है और इसके लिए महिलाओं को खुद जागरूक होना होगा।
कार्यक्रम में बाल विकास परियोजना अधिकारी मोनिका नैंटा ने घटते लिंग अनुपात पर चिंता जताई। इस दौरान उन्होंने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान को लेकर महिलाओं को जागरूक किया। महिला सशक्तीकरण के लिए सरकार की ओर से चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी इस दौरान उन्होंने महिलाओं को दी।
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स्वास्थ्य शिक्षक सोहन लाल ने कन्या भ्रूण हत्या पर बोलते हुए कहा कि साल 1994 में कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए कानून बनाया गया है। उन्होंने परिवार नियोजन की जानकारी भी दी। खंड विकास अधिकारी विजय कांत नेगी तथा तहसील कल्याण अधिकारी केआर चौहान ने महिलाओं के लिए चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी दी।

अच्छी पहल, जागरूक होंगी महिलाएं
जिला परिषद सदस्य सुभद्रा शर्मा ने बताया कि अमर उजाला की ओर से शुरू की गई मुहिम से महिलाओं को अपने अधिकारों की जानकारी मिल रही है। यह सराहनीय पहल है।

महिलाओं को खुद होना होगा जागरूक
पंचायत समिति छौहारा की अध्यक्ष सुनीता सिंगटा ने बताया कि महिलाओं को स्वयं जागरूक होना बहुत जरूरी है। पुरुषों के दबाव में महिलाएं अपनी आवाज ने उठा पाती हैं।

महिलाओं को मिली अहम जानकारी
आशा मोतियान ने कहा कि अपराजिता कार्यक्रम प्रेरणादायक रहा है। कार्यक्रम में महिलाओं से जुड़े ऐसे विषयों पर चर्चा हुई जो काफी अहम रहे। ऐसे कार्यक्रम होते रहने चाहिए।

महिलाओं के लिए ऐसे कार्यक्रम अहम
कुलवंता धामी ने कहा कि कार्यक्रम में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ विषय पर जागरूक किया गया। कार्यक्रम में महिलाओं को कई अहम जानकारियां भी मिलीं। जिनका पहले पता नहीं था।

सामाजिक कुरीतियों को दूर करने पर दिया बल
मधु बाला ने बताया कि समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने की जरूरत है। ऐसे कार्यक्रमों से महिलाएं अपने अधिकारों को लेकर जागरूक होती हैं। यह सराहनीय शुरूआत है।

बेटियां शिक्षित तो समाज का होगा विकास
पूनम रिठवान ने बताया कि बेटियों के शिक्षित होने से ही समाज का विकास संभव है। सामाजिक कुरीतियों को दूर कर सबको बेटियों की शिक्षा पर ध्यान देने की जरूरत है।

महिलाओं को खुद होना पड़ेगा जागरूक
रीता मोक्टा ने बताया कि समाज में भ्रूण हत्या को रोकने के लिए स्वयं महिलाओं को ही जागरूक होना पड़ेगा। इस संबंध में बने कानून की जानकारी महिलाओं को होनी चाहिए।
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गांव-गांव में चलाना चाहिए अभियान
बबीता ने बताया कि सरकार की बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान को गांव-गांव में चलाना चाहिए। जिससे ग्रामीण स्तर पर लोग बेटियों के साथ किसी तरह का भेदभाव न करें।

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