रोहड़ू। महासू देवता के नवनिर्मित मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम मंगलवार को देवताओं की विदाई रस्म उछड़ पाछड़ के साथ संपन्न हो गया है। देवताओं की विदाई से पूर्व रास मंडल बनाकर देवलु पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों पर दिन भर नाचते रहे। कार्यक्रम के समापन के साथ ही सभी देवता अपने-अपने मंदिरों में वापस लौट गए हैं।
कठासू में तीन दिनों से चल रहा महासू देवता मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम धूमधाम से मंगलवार को संपन्न हो गया है। मंगलवार को सुबह नवनिर्मित मंदिर प्रांगण में रास मंडल बनाया गया। सबाड़ से देवता सबाड़सू महाराज, उत्तराखंड से बौठा महासू (ढोरिया), उत्तराखंड से देवता बाशिक महाराज (ढोरिया), ठडियार से देवता पवासी, रांईगी से देवता शेड़कुलिया, बटाड़ से देवता महासू, खोणी से देवता महासू देवता की उपस्थिति में देवलु रास मंडल में प्रवेश कर तलवारें लहराते हुए नाचते रहे। देवलुओं के साथ-साथ देवताओं ने भी जमकर नृत्य किया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण हथियारों से सुसज्जित देवलुओं का पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों पर नृत्य रहा। मेजबान देवता महासू कठासू ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी देवताओं और उनके साथ आए देवलुओं को विदाई दी।
महासू देवता के बजीर अनिल मेहता, भंडारी शशि दानसिंगटा, नंबरदार प्रताप राजटा और देवता के गूर गुलट राम राजटा के अनुसार प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। सभी मेहमान देवता अपने-अपने स्थानों को वापस लौट गए हैं। महासू देवता अपने नवनिर्मित मंदिर में विराजमान हो गए हैं।