अमर उजाला ब्यूरो
कुमारसैन (रामपुर बुशहर)।
जनवरी में बारिश और बर्फबारी न होने से कोटगढ़, कुमारसैन, सांगरी और छविशि क्षेत्रों के बागवानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिसंबर में बर्फबारी होना सेब उत्पादन के लिए बहुत उपयोगी है। सर्दियों में बर्फ और बारिश सेब की फसल के लिए आवश्यक चिलिंग आवर्स की जरूरत पूरी करती है लेकिन इस वर्ष दिसंबर और जनवरी के दो सप्ताह तक बारिश का नामोनिशान नहीं है। इससे सेब की फसल प्रभावित हो रही है। बारिश और बर्फबारी न होने के कारण बागवानों को बगीचों में तौलिये, खाद डालने, स्प्रे करना और नए पौधरोपण करने में मुश्किलें पेश आ रही हैं। बागवान बारिश का इंतजार कर रहे हैं। जनवरी के दूसरे सप्ताह में काटछांट का काम भी पूरा हो जाता है, लेकिन उससे पहले बगीचों में तौलिये करने आवश्यक हैं। सेब की फसल के लिए 72 घंटे चिलिंग आवर्स का होना आवश्यक है। बारिश न होने से सेब की फसल के लिए आवश्यक नमी पूरी नहीं हो पाई है। बागवानी विशेषज्ञ नीटू धर्मा का मानना है कि दिसंबर और जनवरी में सेब की पैदावार के लिए बारिश और बर्फबारी अति आवश्यक है। दिसंबर में गिरने वाली बर्फ सेब के पौधों को लगने वाले कीटों से भी निजात दिलाती है। सेब की फसल को लगने वाले कैंकर रोग के भी कम होने की संभावना रहती है। मौसम की बेरुखी ने बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। बागवान अपने बगीचों में सेब पौधों को रोप नहीं पा रहे हैं। इस बार बारिश न होने के कारण बागवानों से संबंधित तमाम कार्य ठप पड़े हुए हैं। आगामी फसल पर भी संकट के बादल छाने लगे हैं। कोटगढ़, सांगरी, छविशि और कुमारसैन के बागवान सुरेश, यशवंत, गोपाल, तारा चंद, युगल किशोर, मनमोहन, राकेश, अजीत और रोशन लाल ने बताया कि अब तक वे अपने बगीचों में पौधे लगाने का कार्य 50 प्रतिशत तक निपटा देते थे। इस बार बारिश न होने से काम लटका पड़ा है। सूखे के कारण बगीचों में पौधों को रोपने के लिए गड्ढे तक तैयार नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में अब बागवानों को बारिश का इंतजार है।