पंचायती राज विभाग की नाकामी ग्रामीण विकास पर पड़ रही भारी
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15वें वित्त आयोग, मनरेगा समेत ग्रामीणों के कई कार्य हो रहे प्रभावित
ग्रामीणों ने सरकार और विभाग से शीघ्र पंचायत सचिवों की तैनाती की उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
सांगला (किन्नौर)। जनजातीय जिला किन्नौर की कई पंचायतों में पंचायती राज विभाग की नाकामी ग्रामीणों पर भारी पड़ रही है। जिले की 14 पंचायताें में पंचायत सचिवों के पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। पंचायत सचिवों के रिक्त पदों के कारण पंचायतों के विकास कार्य लटक गए हैं। इससे 15वें वित्त आयोग, मनरेगा समेत ग्रामीणों के कई कार्य प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार और पंचायती राज विभाग से जल्द पंचायत सचिवों की तैनाती की मांग उठाई है।जिला की 73 पंचायतों में से 14 पंचायतों में सचिव के पद कई वर्षों से खाली चल रहे हैं। ऐसे में जहां ग्रामीण क्षेत्राें के विकास कार्य लटक गए हैं, वहीं ग्रामीणों के कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। 15वें वित्त आयोग और मनरेगा कार्य में दिक्कतें पेश आ रही हैं। जिला की बड़ा कंबा पंचायत में वर्ष 2021, रूपी में 2017, निचार में 2023, पानवी में वर्ष मार्च 2025, यांग्पा-1 में वर्ष 2022 से पंचायत सचिव के पद रिक्त हैं। इसके अलावा पूनंग में अगस्त 2025, मेबर में मई 2025, सांगला में फरवरी 2025, बटसेरी में 2022, सुमरा में 2023, ज्ञाबुंग में 2023, लियो में मार्च 2025, चुलिंग में वर्ष 2021 और हांगो में जून 2025 से पद रिक्त चल रहे हैं। पूह पंचायत के प्रधान राजेश नेगी, निचार के प्रधान राजपाल नेगी, सांगला के प्रधान देवसांकी नेगी, बटसेरी के प्रधान प्रदीप नेगी, सांगला पंचायत के उपप्रधान लोकेश नेगी, बड़ा कंबा के प्रधान मोनिका नेगी, रूपी पंचायत के पूर्व प्रधान रघुदास नेगी, उपप्रधान मुकेश नेगी, कल्पा पंचायत की प्रधान सरिता नेगी और पानवी के उपप्रधान बुद्धा राम नेगी ने कहा कि पंचायतों में सचिव के पद रिक्त होने के कारण 15वें वित्त आयोग, मनरेगा कार्य, विकास कार्य और ग्रामीणों के निजी कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने सरकार और पंचायती राज विभाग से जल्द पंचायत सचिवों की तैनाती की मांग उठाई है ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके।
रिक्त पदों को लेकर सरकार और उच्चाधिकारियों को समय समय पर पत्राचार किया जा रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही सरकार कोई पहल शुरू करेगी। - संजय ठाकुर, जिला पंचायत अधिकारी रिकांगपिओ