आनी उपमंडल के तहत आने वाले नित्थर क्षेत्र के प्रसिद्ध बूढ़ा महादेव मंदिर में शिव महापुराण कथा एवं महायज्ञ आयोजन के 9वें दिन क्षेत्र के सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। महायज्ञ आयोजन समिति के प्रचार सचिव हर्षानंद शर्मा ने बताया कि देवता बूढ़ा महादेव के सानिध्य में नित्थर क्षेत्र की सुख समृद्धि के लिए महायज्ञ में आचार्य हर दिन शिव महापुराण का संस्कृत एवं हिंदी में प्रवचन कर रहे हैं।
अनुष्ठान में आचार्य सुभाष शर्मा ने शिव महापुराण पर 12 ज्योतिर्लिंगों के इतिहास और मान्यता के बारे में विस्तृत बखान किया। आचार्य ने कहा कि ज्योतिर्लिंग उत्पति के संबंध में कई मान्यताएं प्रचलित हैं। विक्रम संवत के कुछ सहस्त्रावी के पूर्व उल्कापात का अधिक प्रकोप हुआ, आदि मानव को यह रुद्र का अभिर्भाव दिखा। शिव पुराण के अनुसार उस समय आकाश से ज्योतिपिंड पृथ्वी पर गिरे और उनसे थोड़ी देर के लिए प्रकाश फैल गया। यही उल्का पिंड 12 ज्योतिर्लिंग कहलाए। मंडप आचार्य शिव कुमार ने कहा कि दो सौ साल बाद आनी क्षेत्र के प्रसिद्ध शमशरी महादेव देवता 29 अप्रैल को सांय चार बजे नित्थर मंदिर में सैकड़ों देवलुओं के साथ पहुंचेंगे। इसी दिन देवी माता भुवनेश्वरी, चेवड़ी और दुराह के देवी-देवता भी शामिल होंगे। दो सौ साल बाद होने वाले इस ऐतिहासिक देवमिलन कार्यक्रम में जिला कुल्लू आउटर सिराज क्षेत्र के सैकड़ों गांव के लोग गवाह बनेंगे। बूढ़ा महादेव नित्थर के कारदार कर्मचंद ने बताया कि 30 अप्रैल को शिवमहापुराण और क्षेत्र का सबसे बड़े महायज्ञ का विधिवत समापन होगा और मंदिर में भंडारे का आयोजन किया जाएगा।