सांगला (किन्नौर)।
जिले की हजारों आबादी के लिए रिकांगपिओ अस्पताल खोला गया था। लेकिन यहां पर लोगों को उचित स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल रही है। मरीजों से पहले अस्पताल को ही इलाज की जरूरत है। जिले के तीनों खंड के लोगों को उपचार के लिए मजबूरन 90 किलोमीटर दूर रामपुर या फिर 240 किलोमीटर दूर आईजीएमसी शिमला जाना पड़ रहा है। यहां पर दो साल से रेडियोलॉजिस्ट नहीं है, जिससे अल्ट्रासाउंड भी नहीं हो रहे हैं।
अस्पताल में स्पेशलिस्ट डॉक्टर, फार्मासिस्ट और अन्य स्टाफ की कमी है। क्षेत्रीय अस्पताल रिकांगपिओ में वर्तमान में 12 डॉक्टर सेवाएं दे रहे हैं, जबकि अस्पताल में कुल 15 पद स्वीकृत हैं। इसके अलावा अस्पताल में आर्थो स्पेशलिस्ट, मेडिसन स्पेशलिस्ट, रेडियोग्राफर, क्लीनिकल साइकलॉजिस्ट, पेथोलॉजिस्ट का पद वर्ष 2016 से ही पद रिक्त पड़ा हुआ है, जबकि अस्पताल में ईएनटी, डेंटल मेकेनिक, डेंटल हाईजेनिक, चाइल्ड स्पेशलिस्ट और फार्मासिस्टों के पांच पद रिक्त पड़े हैं। रिकांगपिओ अस्पताल दो विषेशज्ञ डॉक्टर के सहारे चला हुआ है। क्षेत्रीय अस्पताल में प्रतिदिन 200 मरीज की ओपीडी रहती है। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड तक की व्यवस्था नहीं हो पाई है, जिस कारण मरीजों को दिक्कतों से दो चार होना पड़ रहा है। जिले के कर्ण लोक्टस, राजेंद्र लामा, दावा छेरिंग नेगी, रामजगत नेगी, राजेश नेगी, मुकेश नेगी, यशपाल नेगी, शैलेंद्र नेगी, दीपक नेगी, दिव्या नेगी, यशवंत नेगी, सूर्या नेगी, बबीता नेगी आदि ने कहा कि पर्याप्त स्टाफ न होने से लोगों को मुश्किल हो रही है। अल्ट्रासाउंड के लिए लोगों को भटकना पड़ रहा है।
सरकार को किया है सूचित : पदम
सीएमओ किन्नौर डॉ. पदम नेगी ने कहा कि चिकित्सकों और अन्य स्टाफ कर्मियों के रिक्त पदों को लेकर बार-बार लिखित पत्र के माध्यम से सरकार और विभागाधिकारियों को सूचित किया जाता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही रिक्त पदों को भरा जाएगा। उन्होंने बताया कि समय-समय पर ग्रामीण क्षेत्रों में शिविरों का आयोजन कर लोगों को उपचार देने का प्रयास किया जा रहा है।