रामपुर बुशहर। मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन की बैठक कुमारसैन में हुई। बैठक की अध्यक्षता ब्लॉक उपाध्यक्ष राजीव ने की।
ब्लॉक महासचिव जगदीश और सीटू क्षेत्रीय कमेटी के महासचिव कुलदीप ने कहा कि 2009 के बाद अभी तक मिड-डे मील वर्करों का वेतन एक रुपया तक नहीं बढ़ाया गया। 2012 में हुए 45वें श्रम सम्मेलन में माना गया था कि मिड-डे मील वर्करों को मजदूरों की श्रेणी में लाया जाएगा और न्यूनतम वेतन लागू किया जाएगा। सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाएगी। मेडिकल की सुविधा दी जाएगी। लेकिन, केंद्र सरकार बजट में लगातार कटौती करके इस योजना को समाप्त करने का काम कर रही है। मिड-डे मील वर्करों से रोजगार छीनने का काम सरकार कर रही है। सीटू क्षेत्रीय कमेटी के सदस्य आशु भारती ने कहा कि प्रदेश सरकार ने मिड-डे मील के वेतन में 300 रुपये की बढ़ोतरी की घोषणा की थी, जो अभी तक नहीं मिल पाई है।
मिड-डे मील वर्करों को न्यूनतम 6750 रुपये वेतन प्रतिमाह दिया जाए। 10 माह के बजाए हरियाणा राज्य की तर्ज पर 12 माह का वेतन दिया जाए। जहां एक ही वर्कर है, वहां हेल्पर की व्यवस्था की जाए। छुट्टियों का प्रावधान किया जाए। पेंशन व ग्रेच्युटी की सुविधा दी जाए। 25 बच्चों की शर्त को हटाया जाए और स्कूलों को बंद न किया जाए।
इस मौके पर सरिता, सीमा, रीता, राजीव, टेक चंद शर्मा, हंसराज, किरण, उर्मिला डोगरा, दीक्षा, रमिला, रीमा, अरुण कुमार, उषा, चुरा राम, गोरा उपस्थित रहे।