विश्व के मानचित्र पटल पर चांशल दर्रा देगा दस्तक
नई राहें नई मंजिल कार्यक्रम के तहत योजना को दिया जा रहा अंजाम
पर्यटन विभाग ने वन विभाग के साथ शुरू की योजना की पहल
रोहडू। करीब 13 हजार फुट ऊंचा चांशल दर्रा विश्व के मानचित्र पर नजर आएगा। पूरी घाटी को पर्यटन की दृष्टि से संवारने के लिए पर्यटन विभाग ने पहल शुरू कर दी है। घाटी में साहसिक पर्यटक गतिविधियों के साथ शीतकालीन खेलों को बढ़ावा देने की योजना तैयार की जा रही है।
पर्यटन विभाग लढोट, शिलादेश और खरशाली सहित आसपास के गांव में पर्यटन स्थलों को उभारने के लिए नई राहें नई मंजिल कार्यक्रम के तहत योजना को अंजाम तक पहुंचाने की पहल कर रहा है। इसके तहत चांशल घाटी में शीतकालीन खेलें, साहसिक पर्यटन, ट्रेकिंग, आसपास झरने, झीलें, एतिहासिक मंदिरों को खाका तैयार कर रहा है। योजना को अंजाम तक पहुंचाने के लिए गांव के लोगों के सुझाव और सहयोग भी लिया जा रहा है। चांशल घाटी में शीतकालीन खेलों के आयोजन की अपार संभावना है। पिछले साल यहां पर अंतरराष्ट्रीय स्तर की स्की बोर्ड खेलों का आयोजन पहली बार किया गया लेकिन अभी तक यहां खेलों के आयोजन के लिए पार्किंग, रहन-सहन खानपान की व्यवस्था, शौचालय सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। इन सुविधाओं को तैयार करने के लिए प्रदेश पर्यटन विभाग वन विभाग के साथ मिल कर काम रहा है।
वीरवार को लढोट गांव में पर्यटन विभाग के उप निदेशक सुरेंद्र जस्टा, डीएफओ रोहड़ू सीबी चंदू तहशीलदार ने लोगों से साथ बैठक करके उनके सुझाव लिए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नई राहें नई मंजिल के तहत रूपरेखा तैयार की जा रही है। इसको अमलीजामा पहनाने के लिए लोगों के सुझाव लिए जा रहे हैं। बैठक के बाद अधिकारियों ने घाटी का दौरा भी किया।
इस दौरान लढोट पंचायत के प्रधान कुलवंत धमी, पूर्व प्रधान रामेश्वर रतवान, चांशल सांस्कृतिक मंच के प्रधान सुदर्शन सिंह, खरशाली पंचायत के प्रधान कृष्ण चौहान, पूर्व प्रधान राजा राम, रेज ऑफिसर गीता राम नेगी, कानूनगो जय देव शर्मा, युवक मंडल महिला मंडल स्थानीय देवता मंदिर कमेटी के सदस्यों ने अधिकारियों के समक्ष अपने सुझाव रखे हैं। ग्रामीणों ने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर का आभार व्यक्त किया गया।