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विधानसभा चुनाव में जिला शिमला ने रखी कांग्रेस की लाज

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रामपुर बुशहर। प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का गढ़ माने जाने वाले जिला शिमला ने आखिरकार कांग्रेस की थोड़ी लाज रख ली है। कांग्रेस ने जिले की रामपुर, रोहड़ू, कुसुमप्टी और शिमला ग्रामीण की सीटों पर विजय हासिल की। वीरभद्र सिंह के गृह क्षेत्र की आरक्षित रामपुर विधानसभा सीट पर नंदलाल ने भले ही सीट जीत ली है पर उनका इस बार जीत का अंतर काफी ज्यादा घटा है।
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नंदलाल ने जीत की हैट्रिक है। भाजपा की झोली में तीन शिमला शहरी, जुब्बल-कोटखाई और चौपाल गई। जिले में माकपा नेता सिंघा ने ठियोग सीट जीतकर खाता खोला है। शिमला ग्रामीण में वीरभद्र के बेटे विक्रमादित्य की लांचिंग के साथ जीत हुई है। प्रचार के दौरान वीरभद्र सिंह ने रामपुर क्षेत्र में प्रचार के दौरान एक ही बात वोटरों से कही थी कि इस सीट से नंदलाल नहीं बल्कि वे खुद ही चुनाव लड़ रहे हैं। शिमला ग्रामीण से पिछली बार वीरभद्र सिंह ने खुद चुनाव लड़ा था और जीतकर छठी बार मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड बनाया था। उन्होंने इस बार शिमला ग्रामीण सीट अपने पुत्र युकां प्रदेशाध्यक्ष विक्रमादित्य सिंह के लिए छोड़ी। इसके अलावा कुसुमप्टी सीट से अनिरुद्ध सिंह भी चुनाव जीत गए और कांग्रेस की झोली में सीट डाली। रोहड़ू से भी कांग्रेस प्रत्याशी के मोहन लाल ब्राक्टा ने भी फिर से चुनाव जीतकर कांग्रेस को ऑक्सीजन दी है। शिमला शहरी से भाजपा के सुरेश भारद्वाज और जुब्बल-कोटखाई से भाजपा के नरेंद्र बरागाटा ने जीत हासिल कर भाजपा को मजबूती दी है। शिमला जिले की ठियोग सीट से भाजपा और कांग्रेस को मार पड़ी है और माकपा नेता राकेश सिंघा ठियोग सीट झटक गए। ठियोग में कांग्रेस की सबसे बड़ी कमजोर यही थी कि प्रत्याशी घोषित करने में अंतिम क्षणों तक ड्रामा चलता रहा। यही नहीं आखिर में पूर्व मंत्री विद्या स्टोक्स ने भी ठियोग विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए पर्चा दाखिल कर दिया था। लेकिन उनका नामांकन रद्द हो गया। बाद में दीपक राठौर ने कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा और हार गए।
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