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National Doctors Day: ये हैं हिमाचल के फ्रंटलाइन के नायक; अस्पताल ही घर, मरीज परिवार

Wed, 01 Jul 2026 06:00 AM IST
Krishan Singh आदित्य सोफत, शिमला।

सार

मरीजों की सेवा के लिए चिकित्सकों ने जैसे अस्पताल को ही घर बना दिया है। दिन-रात मरीजों की तीमारदारी में मशगूल चिकित्सकों के लिए अपने परिवार को समय दे पाना भी बेहद कठिन हो जाता है।
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डॉ. प्रवीण शर्मा, डॉ. सुधीर शर्मा, डॉ. बृज शर्मा। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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धरती पर सफेद कोट में चिकित्सक भगवान के रूप में छिपे हैं। मरीजों की सेवा के लिए चिकित्सकों ने जैसे अस्पताल को ही घर बना दिया है। दिन-रात मरीजों की तीमारदारी में मशगूल चिकित्सकों के लिए अपने परिवार को समय दे पाना भी बेहद कठिन हो जाता है। सुबह ओपीडी में बैठने के बाद, मरीजों की लंबी कतारों के बीच कब सुबह से शाम और शाम से अंधेरा हो जाता है, उन्हें खुद पता नहीं रहता। इसके बाद आपातकालीन कक्ष में सेवाएं और वार्ड के राउंड की व्यस्तता के बीच पूरा दिन बीत जाता है। यही नहीं मरीजों का चिकित्सकों पर इतना विश्वास है कि स्थानांतरण के बाद पुराने क्षेत्र से मरीज चिकित्सकों को ढूंढते हुए दुर्गम क्षेत्रों के अस्पतालों में पहुंच रहे हैं।  राजधानी और दुर्गम क्षेत्र में ऐसे ही  चिकित्सक रोज काम कर रहे हैं जिन्होंने प्रशासनिक गतिविधियों की जिम्मेदारी के साथ ओपीडी और ऑपरेशन थिएटर भी संभाला हुआ है। सेवा भाव के काम के साथ आपदा और किसी भी प्रकार की महामारी में फ्रंट लाइन में रहकर अहम भूमिका निभा रहे हैं।

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सेवाभाव के काम में घर के लिए समय कम

हिमाचल के सोलन जिले के छोटे से गांव हांवा अर्की से निकले डॉ. योगेश भारद्वाज ने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। शोध पत्रों के साथ-साथ मुंह की सर्जरी में नाम कमाया है। हजारों मरीजों को ठीक भी कर चुके हैं। राज्य दंत महाविद्यालय और अस्पताल शिमला में 1999 में प्रोफेसर पद संभालने के बाद पढ़ाई और ओपीडी के कार्यों को बखूबी तरीके से संभाला। 2026 में प्रिंसिपल की जिम्मेदारी दी गई। उन्होंने कहा कि इससे नई सोच के साथ आगे बढ़ने का मौका मिला। ये चिकित्सक कार्य से पूरी तरह अलग है, लेकिन इसके साथ ओपीडी और ओटी भी संभाली है। हर हफ्ते तीन से चार बड़ी सर्जरी के साथ ओपीडी भी संभाली है। दिन-रात मरीजों की सेवा में रहने से परिवार की ओर कम ध्यान दे पा रहे हैं।

नाना को देख चिकित्सक बनने का बचपन से पाला शौक

प्रदेश के दुर्गम क्षेत्र रिकांगपियो में जिला आयुष अधिकारी के रूप में तैनात डॉ. प्रवीण शर्मा ने नाना को वैद्य के रूप में कार्य करता देख बचपन में ही चिकित्सक बनने का शौक पाला। इसके बाद आयुष क्षेत्र में नाम कमाने के लिए पढ़ाई शुरू की। आयुष में नाड़ी विज्ञान में स्नातकोत्तर की पढ़ाई करने के बाद मरीजों की सेवा का कार्य शुरू किया। चिकित्सक होने के साथ प्रशासनिक गतिविधियों को संभालना चुनौती जरूर बना लेकिन इसमें भी अवसर ढूंढ़कर चिंता मुक्ति के साथ कार्य किया। सेवा ही सर्वोपरि मानकर परिवार के साथ समय बिताना कम हो गया लेकिन परिवार और पत्नी डॉ. संदीपा ने साथ दिया।

हेल्थकेयर और रोबोटिक सर्जरी में दिया अहम योगदान

अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के प्रिंसिपल डॉ. बृज शर्मा ने हेल्थ केयर और रोबोटिक सर्जरी में अहम योगदान दिया है। इसे लेकर प्रदेश सरकार की ओर से हिमाचल गौरव पुरस्कार-2026 पुरस्कार से सम्मानित किया है। डॉ. बृज शर्मा प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी की ओपीडी भी संभाल रहे हैं। प्रदेश में पहली बार रोबोटिक सर्जरी शुरू करने के लिए डॉ. पंपोश रैना के नेतृत्व वाले यूरोलॉजी विभाग और एनेस्थीसिया विभाग के चिकित्सक को सम्मानित किया गया।
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देर रात तक ओपीडी में मरीजों की करते हैं जांच

सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाना में चिकित्सा अधीक्षक व न्यूरोलॉजी चिकित्सक डॉ. सुधीर शर्मा ने भी मरीजों में अलग छाप छोड़ी है। सरल और बेहतर स्वभाव होने से पूरे प्रदेश से मरीज चिकित्सक के पास उपचार के लिए आते हैं। जब तक सभी मरीजों को न देख लें तब तक वे ओपीडी को नहीं छोड़ते हैं। कई बार देर शाम तक भी मरीजों को देखने में डॉ. सुधीर व्यस्त रहते हैं। इसी के साथ प्रशासनिक कार्यभार में चिकित्सक ने संभाले हुए हैं।
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