धर्माणी ने कहा कि बैठक में एक एजेंडा यह था कि निजी संस्थानों को दिए जाने वाले रिसर्च फंड पर जीएसटी लगाया जाए और सरकारी संस्थानों पर नहीं। धर्माणी ने कहा कि अगर परिणाम देखे जाएं तो जितने इनोवेशन हुए हैं या हो रहे हैं, वे ज्यादातर निजी संस्थान ही कर रहे हैं। सरकारी क्षेत्र में देश और प्रदेश के कई हाईटेक संस्थानों की गहराई में जाए तो उसी समय यह सब देखने को मिलता है। अगर इन निजी संस्थानों को ज्यादा टैक्स के दायरे में लाया जाता है तो अनुसंधान कार्य स्थगित होंगे। धर्माणी ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा प्रणाली के दायरे में अगर निजी क्षेत्र को लाया जाता है तो उसके भी बहुत अच्छे परिणाम मिलेंगे।
धर्माणी ने कहा कि आज तकनीक की बड़ी जरूरत है। डीप थिंकिंग करके शिक्षक, वैज्ञानिक और टेक्नोक्रेट ही समाधान निकाल सकते हैं। एआई के पास वही समाधान है, जिसे किसी न किसी ने अपलोड किया है। देश और दुनिया आने वाले समय में किस तरफ जाएगी। इसे शिक्षाविदों, शिक्षकों आदि ने तय करना है। नई पीढ़ी, बच्चों की दिशा-दशा, मैनपॉवर आदि को भी शिक्षाविदों ने ही तैयार करना है। धर्माणी ने कहा कि वर्तमान में हिमाचल प्रदेश के समक्ष कई चुनौतियां हैं। इनमें प्राकृतिक आपदा से जुड़ी चुनौतियां भी हैं। हाल ही में हिमाचल प्रदेश भूकंप की दृष्टि से सिस्मिक जोन छह में आंका गया है, जो पहले चार या पांच में था। इस बारे में भी गंभीरता से सोचे जाने की जरूरत है।