सिमसा माता मंदिर लडभड़ोल संवाद
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मंडी/लडभड़ोल। तहसील लड़भड़ोल के संतान दात्री माता सिमसा मंदिर में इस वर्ष भी संतान प्राप्ति के लिए महिलाएं नहीं बैठ पाएंगी। दूसरे साल भी कोविड के चलते परंपरा पर प्रतिबंध लगा रहेगा।
बता दें कि हिमाचल के सिमस गांव में एक अनोखा मंदिर है। मान्यता है कि इस देवी के मंदिर में निसंतान महिलाओं के फर्श पर सोने से संतान की प्राप्ति होती है। इस मंदिर को संतान दात्री मंदिर भी कहते हैं। यहां मां शारदा पिंडी रूप में विराजमान हैं। मान्यताओं के अनुसार, मां शारदा के दर्शन के लिए आने वाली महिलाएं भक्तिभाव और विश्वास से मंदिर परिसर में दिन और रात में सोती हैं। मान्यता है कि निसंतान महिला के स्वप्न में मां शारदा किसी मानव स्वरूप में आकर दर्शन देने के साथ संतान प्राप्ति का आशीर्वाद देती हैं। अगर स्वप्न में महिला को किसी फल या कंदफूल की प्राप्ति होती है, तो उसे निश्चय की संतान प्राप्ति होती है।
शरद नवरात्र के लिए मंदिर कमेटी ने तैयारी पूरी कर ली है। शारदा माता मंदिर कमेटी प्रधान विनोद राय ने कहा कि मंदिर कमेटी ने बैठक की। इसमें कमेटी ने प्रशासन निर्णय लिया है कि इस वर्ष भी महिलाओं को बैठने की इजाजत नहीं दी जाएगी। मंदिर में लंगर की व्यवस्था भी नहीं होगी। कोरोना को मद्देनजर उन्होंने बुखार, जुकाम के लक्षण वालों और बीमार लोगों को मंदिर आने से परेहज करने की अपील की। उन्होंने अपील की कि एक-एक करके माता सिमसा के दर्शन करें। मास्क और सैनिटाइजर का इस्तेमाल भी करें।