मंडी। बाजार में इन दिनों स्थानीय सब्जियों के साथ औषधीय गुणों से भरपूर जंगली सब्जियां शहरवासियों को भा रही हैं। कचनार, लिंगड़, सेमल के कोके, बुरांस के फूल, गलगल, एलू और त्रयांबलू आदि लोगों की पसंद बने हुए हैं। सर्दियों में पैदा होने वाली तरड़ी गर्मियों में भी हाथों-हाथ 200 रुपये प्रति किलो और गलगल 40 रुपये किलो बिक रहे हैं।
शहर के चौहटा बाजार में पोस्ट ऑफिस जाने वाली सड़क पर कचनार 40 रुपये प्रतिकिलो, सेमल के कोके और त्रयांबलू 60-60 रुपये किलो बिक रहे हैं। एलू 200 रुपये किलो और बुरांस के फूल 20 से 50 रुपये तक बिक रहे हैं। चौहटा बाजार में सब्जी बेचने बैठी टांडू गांव की रमा देवी बताती हैं कि एलू और बुरांस आदि की चटनी और अचार डालने के लिए लोग बड़ी संख्या में गलगल खरीद रहे हैं। नई पीढ़ी के बजाय बुजुर्ग जंगली सब्जियों को खरीदना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। कई ऑर्डर पर भी मंगवा रहे हैं। तरड़ी और कचनार बेचने बैठी मीना बताती हैं कि भले ही तरड़ी का सीजन खत्म हो गया है, लेकिन कई लोग इसे अभी भी खाना पसंद कर रहे हैं।
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किडनी और लीवर के लिए फायदेमंद कोके की सब्जी
वनस्पति वैज्ञानिक और वल्लभ डिग्री काॅलेज में बाटनी की प्रोफेसर डॉ. तारा सेन बताती हैं कि सेमल के कोके और फूलों की सब्जी किडनी, लीवर और शरीर में पड़ने वाली गांठों के लिए रामबाण हैं। सेमल के कोके के छिलके उतार भिंडी की तरह तड़का लगाकर इसे तैयार किया जा सकता है। स्वाद के लिए दही भी इस्तेमाल कर सकते हैं। डायरिया या दस्त की समस्या को ठीक करने के लिए सेमल के फूलों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए सेमल के फूलों के ऊपरी छिलकों को रातभर पानी में भिगोकर रख दें। अगले दिन सुबह खाली पेट इसमें मिश्री मिलाकर पी लें।
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