जिले की बागवानी चढ़ी खराब मौसम की भेंट
सतीश ठाकुर
गोहर (मंडी)। जिले की लोअर बेल्ट के सेब बगीचों में मौसम की मार से उत्पादन कम होने की आशंका से बागवानों की चिंता बढ़ गई है। फ्लावरिंग के समय हुई ठंड, ओलावृष्टि और बारिश ने सेब सेटिंग पर प्रतिकूल असर डाला है। जिले की लोअर बेल्ट में 20 फीसदी तक ही इस साल सेब उत्पादन हो पाया है। इससे बागवानों को करोड़ों का नुकसान हुआ है। अंतरराष्ट्रीय फल मंडी आजादपुर दिल्ली में सबसे पहले पहुंचने वाला मंडी जिले का सेब इस साल आढ़तियों के लिए राहत नहीं पहुंचा पाएगा। करसोग, चुराग, चरखडी, पांगणा, झूंगी, चौकी, रोहांडा, थमाड़ी, बाढु, कुटाहची, सरोआ, जबाल, फ़ंग्यार, जहल, धंग्यारा, सलाहर, बगस्याड, पंजाई समेत लोअर बेल्ट के कई बगीचे मौसम की मार पड़ने से खाली हो गए हैं। हजारों बागवानों को इस साल फसल कम होने से बागवानी में खर्चा भी न निकलने चिंता सता रही है। बागवानों का प्रति सेब बागीचा खर्च (प्रूनिंग, खाद, तौलिये और छिड़काव) डेढ़ से दो लाख तक बैठता है। ऐसे में कई बगीचे ऐसे हैं जहां खुद के खाने के लिए भी सेब नहीं हैं। बागवानों रमेश ठाकुर, रामलाल, सुरेश, डोलेराम, लीला प्रकाश, जीत कुमार, लाभ सिंह, प्रेम ठाकुर, परमा राम, यशवंत कुमार, गुरदयाल ठाकुर, देवेंद्र ठाकुर, शेर सिंह और दुष्यंत ने बताया कि कई बगीचों में सेब की बहुत कम सेटिंग हुई है। इससे बागवानों को भारी नुकसान हुआ है। बागवानों ने बताया कि लाखों की नेट लगाने के बावजूद ठंड, बारिश और ओलावृष्टि के साथ आए अंधड़ ने बागवानों की कमर तोड़कर रख दी है। दिल्ली स्थित क्रॉस कंपनी आढ़ती नरेश ढल ने बताया कि मंडी जिले की लोअर बेल्ट से सेब की बेहद कम फसल की रिपोर्ट उनके पास आई है। जून के पहले सप्ताह वह मंडी के तीन बगीचों का दौरा करेंगे जिसके बाद कुछ कहा जा सकता है।
बागवानी विशेषज्ञ डॉ. एसपी भारद्वाज ने कहा कि लोअर बेल्ट में मौसम की खासी मार पड़ी है। इससे सेब का उत्पादन 20 फीसदी से नीचे तक आ गया है। मंडी में 35 लाख सेब पेटी उत्पादन होता है लेकिन इस बार यह आंकड़ा बेहद नीचे जा सकता है।