शिमला में दूषित पानी से पीलिया फैलने के बाद मंडी में भी आईपीएच विभाग सतर्क हो गया है। ब्यास नदी के पानी को लिफ्ट कर कांगणीधार में रॉ वाटर टैंक में पानी को ट्रीटमेंट किया जाता है। जिसके बाद शहर के लोगों को यह पानी सप्लाई होता है। अभी तक ट्रीटमेंट प्लांट में पानी को शुद्ध करने के लिए ब्लीचिंग पाउडर मैनुअली डाला जाता था।
जिससे ब्लीचिंग पाउडर की मात्रा कम या ज्यादा डाले जाने की कमी रह सकती है। साथ ही ब्लीचिंग पाउडर थैलों में पड़े रहने से खराब होने की दिक्कत रहती है। जिसे देखते हुए विभाग ने अब ट्रीटमेंट प्लांट में गैस क्लोरीनेशन तकनीक स्थापित किया है। इस सिस्टम से सिलेंडरों के माध्यम से क्लोरीनेशन गैस ट्रीटमेंट प्लांट के पानी में मिक्स होगी।
आईपीएच विभाग मंडी जोन के मुख्य अभियंता राजेश बख्शी ने बताया कि अभी तक गैस क्लोरीनेशन तकनीक को मंडी के कांगणीधार ट्रीटमेंट प्लांट में इस्तेमाल किया गया है। इस तकनीक के बाद अब ट्रीटमेंट प्लांट में ब्लीचिंग पाउडर डालने का काम मैनुअली खत्म हो जाएगा। गैस क्लोरीनेशन तकनीक से सही मात्र में क्लोरी गैस पानी में डाली जा सकेगी।