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Mandi News: बल्ह में लाल सोने की खेती का बढ़ा रुझान, इंजीनियर और एमबीए पास बन गए किसान

Sun, 05 May 2024 11:06 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
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बल्ह  घाटी के एक खेत में लगाए गए टमाटर फसल। संवाद
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नेरचौक (मंडी)। मिनी पंजाब के नाम से विख्यात बल्ह घाटी उत्तर भारत में टमाटर की सप्लाई देने के लिए फिर तैयार होने लगी है। घाटी में 1200 हेक्टेयर भूमि में टमाटर की फसल लगाई जा रही है। बल्ह घाटी का लाल सोना यानी टमाटर जून-जुलाई के महीने में बाजार में आ जाता है। पिछली साल घाटी के टमाटर का पांच हजार रुपये तक क्रेट बिका था। इससे किसानों ने लगभग 700 करोड़ का कारोबार किया था। ऐसे में इस बार भी किसानों का रुझान टमाटर खेती की तरफ बढ़ा है। बीते वर्ष 24 से अधिक किसान टमाटर की उपज बेचकर करोड़पति बने थे।
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टमाटर के चोखे दाम मिलने से इस वर्ष अधिक भूमि पर टमाटर फसल किसानों ने लगाई है। चार महीने की नकदी फसल से मालामाल होने की चाह में किसान टमाटर की खेती में रुचित दिखा रहे हैं। बल्ह में स्काटा-4223, लाल सोना, रॉयल, पानी-1263, अंसल, अभिमन्यु, गोल्डन-1247, कलर्स- 816, बंटू, रिजवान-444 अवतार-1711, यूएस-920 किस्म के टमाटर का बीज खेतों में रोपा जा चुका है।
बल्ह घाटी में टमाटर की खेती का रुझान काफी बढ़ गया है। इंजीनियर, एग्रीकल्चर एमबीए कर चुके बल्ह के युवा भी अब टमाटर की नकदी फसल से रोजगार पा रहे हैं। नागचला के राकेश ठाकुर उर्फ गंगा, भंगरोटू के धनदेव ठाकुर, नेरचौक से मार्केटिंग हेड राजकुमार और नेरचौक सब्जी मंडी के अध्यक्ष डिंपल सैनी जैसे पढ़े-लिखे युवा टमाटर की खेती से मुनाफा कमा रहे हैं। बल्ह का लाल टमाटर दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, जम्मू-कश्मीर के अलावा मध्य प्रदेश तक सप्लाई किया जाता है।
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जून-जुलाई में पूरे उत्तर भारत को बल्ह के किसान मटर की आपूर्ति करते हैं। बल्ह के राइट बैंक और लेफ्ट बैंक में टमाटर की खेती की गई है। नेरचौक, रति, ढांगू, ढावण, सोयरा, गलमा, राजगढ़, कुम्मी, नागचला, गागल, कनैड, घटा, बोरा, पैड़ी, बगला, रागढ़, कैहेर, खैदला, सटोह, चावरी, साकरोहा, नलसर, लोहारा और कंसा में भी टमाटर की खेती गई है।

बांस के डंडों की भी बढ़ी मांग
टमाटर के पौधों को बांस के डंडों से सहारा देने का काम जोरों पर है। टमाटर के छोटे पौधे के साथ ही बांस की डंडियां लगानी पड़ती हैं। टमाटर का पौधा इसके ऊपर चढ़ जाता है और टमाटर की फसल खराब होने का डर नहीं रहता। किसान इस तकनीक से बंपर पैदावार लेते हैं। इन दिनों यह काम जोरों से चला हुआ है। इसमें किसान यूपी, बिहार के पांच हजार से अधिक मजदूरों को भी रोजगार दे रहे हैं। इस कार्य के चलते बांस की बिक्री भी एकाएक बढ़ गई है। इससे बांस उत्पादन और बांस मालिकों को भी खूब मुनाफा हो रहा है।

जुए की तरह है टमाटर की खेती
टमाटर की फसल जुए के समान है। टमाटर का एक क्रेट 50 से लेकर पांच हजार रुपये तक भी बिकता है। यदि बाहरी राज्यों में टमाटर की पैदावार कम होती है तो यहां के किसान मालामाल हो जाते हैं। अगर दूसरे राज्यों में अच्छी पैदावार से यहां के किसान को घाटा सहना पड़ता है।

इस बार 1200 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में हुई बिजाई
कृषि विशेषज्ञ चौधरी राम ने बताया कि बल्ह घाटी में 1,000 हेक्टेयर भूमि पर टमाटर की फसल बिजी जाती थी। इस वर्ष 1200 हेक्टेयर भूमि में अधिक में टमाटर की फसल उगाई जा रही है। किसानों से आग्रह है कि वे ऑर्गेनिक खेती की तरफ अधिक ध्यान दें। आवश्यकता अनुसार ही दवाओं का छिड़काव करें।
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