बल्ह घाटी में मौसम के उतार-चढ़ाव से ब्लाइट रोग का खतरा
करीब 1500 हेक्टेयर क्षेत्र में होती है टमाटर की खेती
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। बल्ह घाटी में इस बार टमाटर के पौधों में अपेक्षा से कम फ्लावरिंग हो रही है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। रोपाई के बाद लगातार बारिश से पौधों का तेजी से विकास हुआ और पौधे घने व हरे-भरे हैं, लेकिन अन्य वर्षों की तुलना में फूल कम आ रहे हैं। इससे उत्पादन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। इन दिनों खेतों में टमाटर का आकार बनना शुरू हो गया है।
घाटी में करीब 1500 हेक्टेयर क्षेत्र में टमाटर की खेती हो रही है। यहां हर वर्ष 70 से 80 लाख क्रेट टमाटर का उत्पादन होता है, जिसे पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर तक भेजा जाता है। राजगढ़, स्टोह, कैहड़, खियूरी, चुवाड़ी, खांदला, कुम्मी, छातड़ू, नलसर, लोहारा, टांवा, डिनक, ढाबण, कनैड, स्योहली, साई, जरल, दयारगी, नागचला, चंडयाल, भडयाल, सिहन, सकरोहा और हटगढ़ क्षेत्रों में किसान बड़े स्तर पर टमाटर की खेती कर रहे हैं। लोहारा निवासी श्याम लाल, गुड्डू, पालू वालिया और हुकम चंद ने बताया कि इस बार फ्लावरिंग कम होने से उत्पादन घटने का अंदेशा है। मौसम के उतार-चढ़ाव से ब्लाइट रोग का खतरा भी बढ़ गया है।
कृषि उपनिदेशक जिला मंडी राम चंद्र चौधरी ने बताया कि विभाग की टीमें लगातार फील्ड का दौरा कर रही हैं। किसानों को फसल को बीमारियों से बचाने और समय-समय पर दवाइयों के छिड़काव की सलाह दी जा रही है।