मां का दर्द देख नहीं पा रहे लोग, नजरे मिलाने की नहीं हो पा रही हिम्मत
रमेश भारद्वाज
सरकाघाट (मंडी)। सरकाघाट के नैण गांव में कदम रखते ही सन्नाटा और सिसकियों की आवाज एक साथ महसूस होती है। सिया की असमय मौत ने पूरे माहौल को ऐसा बना दिया है मानो समय थम गया हो। घर के आंगन में बैठी मां की सूनी आंखें हर आने-जाने वाले से जैसे एक ही सवाल पूछती हैं-आखिर मेरी बेटी का कसूर क्या था।
रोजाना बड़ी संख्या में लोग घर पहुंच रहे हैं। कोई ढांढस बंधाने आता है तो कोई चुपचाप बैठकर परिवार के दुख को साझा करने की कोशिश करता है, लेकिन जैसे ही किसी की नजर सिया की मां से मिलती है, शब्द गले में ही अटक जाते हैं। किसी में इतनी हिम्मत नहीं कि उस मां के दर्द को कम कर सके, जिसने अपनी सबसे बड़ी उम्मीद खो दी है। घर की दीवारें, आंगन और हर कोना उसकी यादों से भरा हुआ है, जो हर पल जख्म को और गहरा कर देता है।
परिवार के सदस्य भी गहरे सदमे में हैं। रो-रोकर उनका बुरा हाल है। गांव की महिलाएं मां के पास बैठकर उन्हें संभालने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन खुद की आंखें भी नम हो जाती हैं। हर किसी के चेहरे पर एक ही सवाल है कि ऐसा आखिर क्यों हुआ। उधर, स्थानीय लोगों प्रमोद, कश्मीर सिंह, दिवान चंद, बलदेव चंद, नरेंद्र सिंह, रूपलाल व अन्य ने बताया कि इस घटना के बाद नैण गांव में मातम का माहौल है। पूरा गांव परिवार के साथ खड़ा है, लेकिन एक मां की पीड़ा को कोई कम नहीं कर सकता। बेटी अब दूर हो चुकी है, और अब उसकी यादें ही रह गई हैं।