लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज नेरचौक का भवन
नेरचौक (मंडी)। जिला मंडी सहित आसपास के जिलों के लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने वाले श्री लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज नेरचौक में मरीजों को आज तक एमआरआई की सुविधा नहीं मिल पाई है। मेडिकल कॉलेज में एमआरआई मशीन नहीं होने के कारण मरीजों को रोजाना निजी अस्पतालों में जाकर टेस्ट के लिए 8500 रुपये से लेकर 15,000 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
श्री लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज नेरचौक में एमआरआई की सुविधा नहीं होने के चलते जिला मंडी, कुल्लू, लाहौल-स्पीति के अलावा बिलासपुर जिला के कई हिस्सों के लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि एमआरआई की सुविधा आईजीएमसी शिमला, टांडा और एम्स बिलासपुर में उपलब्ध है, लेकिन मध्य जोन में खुले मेडिकल कॉलेज में इसकी दरकार है।
मेडिकल कॉलेज में रोजाना एक दर्जन लोगों के लिए एमआरआई का टेस्ट डॉक्टर लिखते हैं। रोजाना यहां पर 1500 तक की ओपीडी होती है और यहां पर कुल्लू, मंडी, लाहौल-स्पीति और आसपास के क्षेत्रों से मरीज गंभीर बीमारियाें के उपचार के लिए पहुंचते हैं।
मेडिकल कॉलेज नेरचौक के प्रिंसिपल डॉ. डीके वर्मा ने कहा कि लगातार प्रदेश सरकार से इस सुविधा की मांग कर रहे हैं।
सरकार का ध्यान जनहित पर नहीं : जयराम ठाकुर
पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि यह प्रदेश सरकार का कार्य है। मुख्यमंत्री का पूरा ध्यान सरकार बचाने में लगा हुआ है। लोगों की मूलभूत सुविधाओं से उनका ध्यान पूरी तरह से भटका हुआ है। लोगों की स्वास्थ्य से इस तरह का खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। यहां तुरंत प्रभाव से जनहित को सुविधा को ध्यान में रखते हुए एमआरआई मशीन स्थापित की जानी चाहिए।