नेरचौक (मंडी)। जिलेभर में तीन दिन पहले हुई बूंदाबांदी को किसान-बागवान फसलों के लिए नाकाफी मान रहे हैं। बारिश न होने से खेतों में गेहूं की फसल पीली पड़ने लगी है। साथ ही सब्जियों की फसल भी प्रभावित हो रही है। मिनी पंजाब के नाम से मशहूर बल्ह घाटी में करीब चार माह से बारिश नहीं हुई है। ऐसे में ऊपरी बल्ह क्षेत्र में सबसे ज्यादा असर पड़ा है।
बारिश पर आश्रित किसानों की फसलें खराब हो गई हैं। बारिश के अभाव में इस बार किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा। घाटी के किसानों का कहना है कि इस तरह के हालात उन्हाेंने पहले नहीं देखे। अभी गेहूं की फसल जमीन से निकली ही है कि बारिश न होने से पीली पड़ने लग पड़ी है। उधर जिला कृषि उपनिदेशक रामचंद्र चौधरी ने कहा कि बारिश न होने से ऊपरी बल्ह घाटी में फसलों पर ज्यादा असर पड़ रहा है। बारिश न होने से नुकसान होना शुरू हो गया हैं, फील्ड से 5 से 7 प्रतिशत नुकसान आना शुरू हो गए हैं।
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बारिश न होने से जहां फसलों को नुकसान हुआ है वहीं शुष्क सर्दी से लोग बीमार पड़ गए हैं। खेतों में बिजी गई गेहूं की फसल बिना बारिश से पीली पड़ गई है और उसका विकास रुक गया है।
-जोध सिंह ठाकुर, किसान
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कम बारिश खेतीबाड़ी के लिए चिंता का विषय है, लंबे अरसे से बारिश नहीं हुई है। अब की बार लगा था कि बारिश ठीक होगी और गेहूं सहित नगदी फसलों की बंपर पैदावार होगी। बारिश न होने से गेहूं, सब्जियां और फलों पर असर दिखना शुरू हो गया है।
-प्रेम सिंह, किसान
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लावारिस पशुओं, जंगली जानवरों की वजह से अधिकांश लोगों ने खेती करना छोड़ दिया है। जिन किसानों ने फसल बिजाई की है उन्हें बिना बारिश से नुकसान झेलना पड़ेगा। किसानों की सुध लेने वाला कोई नहीं है, उस पर मौसम भी साथ नहीं दे रहा।
-राज कुमारी, किसान
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25 सितंबर के बाद अब तक बारिश न होना चिंता का विषय है। ऐसा ही रहा तो इस बार गेहूं सहित सब्जी और फलों पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा। इनकी पैदावार प्रभावित होगी और किसानों को नुकसान झेलना पड़ेगा।
-नेत्र सिंह नायक, सेवानिवृत्त उप निदेशक, आत्मा परियोजना
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