जोगिंद्रगनर कॉलेज में चल रहे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन अपने वक्तव्य रखते शिक्षाविद। स
जोगिंद्रनगर (मंडी)। जोगिंद्रनगर कॉलेज में चल रहे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन मंगलवार को रीविजिटिंग रूट्स रीइमेजिनिंग फ्यूचर मल्टीडिसिप्लिनरी पर्सपेक्टिव ऑन इंडियन नॉलेज सिस्टम में हिमालयन काउंसिल फॉर साइंटिफिक रिसर्च के तहत वक्ताओं ने अपने शोध प्रस्तुत किए। सम्मेलन में 160 शिक्षाविदों व शोधकर्ताओं ने भाग लिया।
हिमाचल विश्वविद्यालय शिमला की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मीना चौधरी ने मानव स्वास्थ्य पर कीटनाशकों के हानिकारक प्रभावों, विशेष रूप से कैंसर के बढ़ते खतरे पर चर्चा की। आईआईटी मंडी से मानव विज्ञान में सहायक प्रोफेसर नीलांबुर छेत्री ने मंडी जिले की पराशर झील के रास्ते में बागी की उत्पत्ति का उदाहरण देते हुए हिमालय में पर्वत श्रृंगिंग और इसकी आवधिकता पर चर्चा की। उन्होंने स्थिरता के लिए नियंत्रित करने योग्य मानव गतिविधि पर जोर दिया।
डॉ. सुरेंद्र सिंह ने भारतीय ज्ञान प्रणाली और इसके ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में अंतर्दृष्टि दी। सत्र के अंत में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के डॉ. एरिक मोरन ने प्रारंभिक औपनिवेशिक हिमालय में अपराध और सजा पर बहस करने के अपने शोध कार्य को प्रस्तुत किया।