नगर निगम के सुहड़ा वार्ड में संपत्ति सर्वे व पैमाइश करते अधिकृत कंपनी के कर्मचारी। संवाद
मंडी। नगर निगम के वार्डों में रहने वाले किरायेदारों का अब सटीक आंकड़ा सामने आएगा। संपत्ति पुरानी अथवा नई है, इसका भी पता चलेगा। भवन में मालिक स्वयं रहता है या फिर उसने किराये पर दे रखा है, इन सभी बिंदुओं को केंद्र में रखते ही शहरवासियों को गृहकर के बिल जारी होंगे। करीब 10 साल बाद शहर में संपत्तियों का सर्वे व पैमाइश का कार्य शुरू हो गया है। शहरी विकास विभाग की ओर से अधिकृत कंपनी एजिसेक के कर्मचारी वार्डों में जुट गए हैं।
नगर निगम के वार्ड नंबर 10 सुहड़ा मोहल्ला और समखेतर वार्ड में कंपनी के कर्मचारी घर-घर पहुंच कर सर्वे और पैमाइश का कार्य कर रहे हैं। पुराने रिकार्ड के साथ संपत्तियों का मिलान किया जा रहा है। 10 साल की अवधि में नगर निगम क्षेत्र में संपत्तियों का आंकड़ा कई गुना बढ़ गया है। वर्तमान में संपत्तियों का आंकड़ा 16 हजार तक पहुंचने की नगर निगम को उम्मीद है। नगर निगम अभी तक पुराने सर्वे के अनुसार 9 हजार संपत्तियों से गृहकर वसूल रहा है।
नगर निगम के कर्मचारियों ने अपने स्तर पर कुछ संपत्तियों का पता लगाया है तो वहीं कुछ शहरवासियों ने अपनी संपत्तियों का आंकड़ा निगम कार्यालय में स्वयं भी उपलब्ध करवाया है। नगर निगम को वर्तमान में करीब 2.62 करोड़ रुपये हर साल संपत्ति कर से आय हो रही है। जब निगम के पास संपत्तियों का सटीक आंकड़ा पहुंच जाएगा तब आय का यह आंकड़ा भी दोगुना होने की उम्मीद है।
इस प्रक्रिया को पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए हाल ही में नक्शा कार्यक्रम के तहत लिडार सर्वे किया गया था। इस डिजिटल सर्वे से प्राप्त डाटा को अब राजस्व विभाग के माध्यम से सत्यापित करवाया जाएगा। नगर निगम ने संपत्तियों को ए, बी, सी और डी श्रेणियों में बांटा है। मर्ज क्षेत्र वाले वार्डों से भी नगर निगम सर्वे के बाद संपत्ति कर वसूल करेगा।
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नगर निगम के सुहड़ा और समखेतर वार्ड में संपत्तियों का सर्वे एवं पैमाइश कार्य शुरू हो गया है। वार्डवासी सर्वे के लिए पहुंच रहे कर्मचारियों का सहयोग करें।
-रोहित राठौर, आयुक्त नगर निगम मंडी
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