मंडी। जिला न्यायाधीश मंडी की अदालत ने फोरलेन निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण के मुआवजे से जुड़े मामले में एनएचएआई की याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि मध्यस्थ द्वारा पारित अवार्ड पूरी तरह कानून सम्मत है और इसमें हस्तक्षेप का कोई कानूनी आधार नहीं बनता। इस फैसले के बाद अब प्रभावित भू-मालिक को मुआवजे के साथ 15 फीसदी तक ब्याज भी मिलेगा।
यह मामला मंडी जिले की बल्ह तहसील के गांव दौंधी (नागचला) की भूमि से जुड़ा है। नेशनल हाईवे-21 के चौड़ीकरण और फोरलेन निर्माण के लिए केंद्र सरकार ने इस भूमि का अधिग्रहण किया था। सक्षम प्राधिकारी बिलासपुर ने 27 अप्रैल 2019 को मुआवजा निर्धारित किया था, जिससे भू-मालिक विजेंद्र सिंह संतुष्ट नहीं थे और उन्होंने मध्यस्थ के पास गुहार लगाई थी।
मध्यस्थ ने 6 फरवरी 2024 को अपने आदेश में बाजार मूल्य बढ़ाने की मांग तो नहीं मानी, लेकिन भू-मालिक को उचित मुआवजा अधिनियम 2013 के तहत वैधानिक लाभ देने का आदेश दिया। इसमें मुआवजे की राशि पर पहले वर्ष 9 प्रतिशत और उसके बाद 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का प्रावधान किया गया।
एनएचएआई ने इस अवार्ड को निरस्त करने के लिए जिला अदालत में याचिका दायर की थी। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माना कि मध्यस्थ का फैसला न तो अवैध है और न ही सार्वजनिक नीति के विरुद्ध। न्यायालय ने एनएचएआई की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए मध्यस्थ के अवार्ड को सही ठहराया।