पधर (मंडी)। प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ लेने के लिए गरीबी रेखा से नीचे गृह निर्माण के इच्छुक आवेदकों का घर बनाने का सपना बजट के अभाव में पूरा नहीं हो रहा। तहसील कल्याण कार्यालय पधर में ऐसे आवेदकों की सूची लंबी होती जा रही है। आवेदकों ने सरकार की ओर से गृह निर्माण के लिए आवेदन कर रखा है। इनकी सालाना आय 50 हजार से कम बनती है।
कुछ एक आवेदकों को आवेदन किए हुए पांच से दस साल का समय हो गया है मगर बजट के अभाव में गृह निर्माण के लिए अनुदान राशि जारी नहीं हो पाई है। बजट आने पर विभाग ऐसे आवेदकों को प्राथमिकता में शामिल करता है, जिनके पास रहने को मकान नहीं है। ऐसे में अन्य आवेदकों को लंबे इंतजार की कतार में शामिल होना पड़ रहा है। तहसील कल्याण विभाग कार्यालय से मिले आंकड़ों के अनुसार वेटिंग लिस्ट में ऐसे भी आवेदक हैं, जिन्होंने वर्ष 2012 से गृह निर्माण के लिए आवेदन कर रखा है।
अनुदान के लिए आवेदक अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा श्रेणी के संबंध रखते हैं। आपदाग्रस्त लोगों को सरकार अन्य हेड से भी मकान बनाने की मदद कर रही है। बजट आने पर विभाग आवेदकों की सूची जिला कार्यालय को भेज रहा है, जहां से प्राथमिकता के आधार पर उन्हें सूची में शामिल किया जाता है। मौजूदा समय में 121 लोग अनुदान राशि मिलने को लेकर बजट का इंतजार कर रही है।
उधर, तहसील कल्याण अधिकारी पधर संजय कुमार ने बताया कि बजट आने पर आवेदकों की सूची जिला कार्यालय को भेजी जाती है। सूची में मकान विहीन परिवारों को प्राथमिकता में शामिल किया जाता है। ऐसे परिवारों को आवेदन समय में छूट रहती है।
केस स्टडी एक
गजौन कुन्नू निवासी जसवीर सिंह ने बताया कि गृह निर्माण के लिए अनुदान राशि प्राप्त करने को तहसील कल्याण अधिकारी कार्यालय पधर में वर्ष 2020 में आवेदन कर रखा है। विभाग की ओर से उनके आवेदन को मंजूर नहीं किया गया है। उनके घर बनाने का सपना अधर में लटका है।
केस स्टडी दो
स्नेड पधर निवासी राकेश कुमार का कहना है कि आवेदन किए हुए पांच वर्ष का समय पूरा हो गया है। मकान बनाने को सुरक्षित रखी जमा पूंजी राशि भी समाप्त हो गई है।
केस स्टडी तीन
चौहारघाटी के सनवाड़ निवासी ओबीसी आवेदक भाग चंद ने कहा कि मकान बनाने को विभाग के पास वर्ष 2021 में आवेदन किया है। उन्हें अनुदान राशि की मंजूरी नहीं मिल पाई है।
केस स्टडी चार
उरला के मसवाहण निवासी दुर्गा देवी ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2021 में गृह निर्माण अनुदान के लिए आवेदन किया है। कार्यालय में पता करने पर बजट का अभाव कारण बताया जा रहा है।