मंडी। मातृ शिशु अस्पताल (एमसीएच) मंडी में अपना स्टाफ न होने से जोनल अस्पताल के स्टाफ से काम चलाया जा रहा है। सौ बिस्तर वाले एमसीएच में पिछले करीब तीन वर्षों से प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग स्टाफ की तैनाती नहीं कर पाया है। ऐसे में जोनल अस्पताल के नर्सिंग और सफाई कर्मचारियों पर काम का अतिरिक्त बोझ है।
इन्हें रात-दिन विभिन्न वार्डों और ओटी में डबल ड्यूटी देनी पड़ रही है। जोनल और एमसीएच के चार भवनों की सफाई व्यवस्था का जिम्मा ठेके पर रखे मात्र 40 कर्मचारियों पर है। केंद्र सरकार की ओर से मंडी और सुंदरनगर के लिए दो एमसीएच की स्वीकृति दी थी। मंडी में जुलाई 2022 में 30 करोड़ की लागत से निर्मित एमसीएच भवन का शुभारंभ पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने किया था। सुंदरनगर में भी एमसीएच शुरू हो गया था मगर उस दौरान सरकार दोनों अस्पतालों में स्टाफ की तैनाती नहीं कर पाई थी। सत्ता बदलने के बाद प्रदेश की कांग्रेस सरकार भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रही। इससे कर्मचारियों पर काम का अधिक बोझ बढ़ गया है।
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एमसीएच में सेवाएं दे रहे स्टाफ पर काम का अतिरिक्त बोझ है। एक नर्स को वार्ड सहित ओटी में भी सेवाएं देनी पड़ रही हैं। एक नर्स को दो-दो वार्डों का काम भी देखना पड़ रहा है। जोनल अस्पताल मंडी में अभी मात्र 45 स्टाफ नर्सों के पद स्वीकृत हैं, जिनमें 10-15 पद विभिन्न कारणों से खाली चल रहे हैं। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से मांग की है कि एमसीएच में शीघ्र स्टाफ की तैनाती करवाई जाए।
-अरुणा लूथरा, चेयरपर्सन, हिमाचल प्रदेश नर्सिंग एसोसिएशन
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एमसीएच मंडी में स्टाफ तैनाती को लेकर स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों से पत्राचार कर अवगत करवाया गया है। स्वीकृति मिलते ही स्टाफ की तैनाती कर दी जाएगी।
-डॉ. धर्म सिंह वर्मा, चिकित्सा अधीक्षक
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