मंडी/पंडोह। मंडी से पंडोह के बीच एनएच की हालत खराब है। यहां पहाड़ी से गिरते पत्थर बड़ा खतरा बने हुए हैं। पर्यटन सीजन के बीच पर्यटकों समेत स्थानीय वाहन यहां से खौफ के साये से गुजरते हुए आगे निकलेंगे। मंडी से पंडोह के बीच कई जगह पर एनएच तंग हो गया है। यहां गिरे हुए मलबे को अभी तक नहीं हटाया जा सका है। इससे पर्यटक भी घबरा जाते हैं। पर्यटन पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
मंडी से कुल्लू जाने के लिए यही मुख्य मार्ग है। वैकल्पिक मार्ग में वाया कटौला मार्ग की हालत भी कुछ सही नहीं है। संकरा व बेहद घुमावदार होने के चलते पर्यटकों को यह मार्ग रास नहीं आता है। मंडी से पंडोह तक अधिकतर भाग तो दुरुस्त कर लिया गया है, लेकिन पहाड़ी से गिरने वाले पत्थर व चट्टानें कब गिर जाएं, इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है।
मंडी से पंडोह के बीच सफर करने वाले यात्री भी इस खौफ से गुजरते हुए सफर करते हैं। पंडोह क्षेत्र के लोग जिला मुख्यालय के स्कूलों में भी अपने बच्चों का दाखिला इसी डर से नहीं करवा पा रहे हैं।
स्थानीय लोगों की मानें तो निर्माण कार्य में लगी कंपनी बेहद ढिलाई के साथ कार्य कर रही है। चार, छह व नौ मील में खतरा बरकरार है। मंडी से लेकर बनाला तक पहाड़ी से कभी पत्थर गिर सकते हैं। हालांकि यहां बीच में कुछ टनल से यातायात गुजरता है तो राहत है लेकिन कुछ भाग में पुराने एनएच से यातायात गुजरता है।
उधर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मंडी सागर चंद्र ने बताया कि मौजूदा समय में भी फोरलेन कार्य के लिए दिन में एक-एक घंटा सुबह व शाम यातायात रोका जा रहा है। पर्यटकों समेत स्थानीय वाहन चालकों से अपील है कि पहाड़ी में किसी भी प्रकार की हलचल हाेने पर आगे न बढ़ें और वाहन को सुरक्षित स्थान पर खड़ा कर दें।
काम के सिलसिले में मंडी से पंडोह आना-जाना लगा रहता है। कभी जाम तो कभी समय अनुसार यातायात बंद रहता है। पहाड़ी पर लटकी चट्टानों से भी डर लगता है। प्रशासन को चाहिए कि खतरों को देखते हुए इन्हें ठीक करे।
-अभिषेक भारद्वाज, निवासी मंडी
रोजाना दो घंटे जाम के कारण मंडी से पंडोह का सफर मुश्किल हो गया है। फोरलेन का काम नाममात्र का ही किया जा रहा है। प्रशासन को इस पर निगरानी करनी चाहिए। कंपनी की जवाबदेही सुनिश्चित करते हुए लापरवाही पर कार्रवाई होनी चाहिए।
-देश राज, स्थानीय निवासी