मंडी। 108 व 102 एंबुलेंस चालकों के हड़ताल पर चले जाने से मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वहीं शिमला में चिकित्सक व मरीज के बीच हुए विवाद के बाद चिकित्सकों के सामूहिक अवकाश पर जाने से स्थिति और गंभीर हो गई। इसका सीधा असर ओपीडी सेवाओं पर पड़ा और मरीजों को जांच सुविधा नहीं मिल सकी।
एंबुलेंस चालकों की हड़ताल का सबसे अधिक असर प्रसूति महिलाओं पर पड़ा। उन्हें अस्पताल से घर पहुंचने के लिए निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ा, जिससे परिजनों की परेशानी और बढ़ गई। हड़ताल और अवकाश के चलते जिला में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित रहीं और मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
स्थान: क्षेत्रीय अस्पताल मंडी। समय : शुक्रवार सुबह 11:30 बजे। चिकित्सकों के अवकाश पर जाने से पर्ची काउंटर पर तैनात कर्मचारी ने मरीजों को चिकित्सकों के अवकाश बारे जानकारी देते हुए केवल आपातकालीन ओपीडी की ही पर्ची बनाई। ऐसे में मरीज मायूस होकर घरों को लौट गए।
उस पर एंबुलेंस सुविधा के अभाव में अस्पताल से छुट्टी होने पर मरीजों को निजी वाहनों की मदद से घर पहुंचना पड़ा। हालांकि वार्डों में उपचाराधीन सभी मरीजों को सुबह के समय चिकित्सकों ने राउंड कर जांच सुविधा दी।
सुबह : 11:45 बजे। एमसीएच के धरातल तल पर सभी ओपीडी कक्ष बंद नजर आए। यहां आ रहे मरीज बैरंग लौट रहे थे। पूछने पर मरीज व तीमारदारों ने बताया कि डॉक्टरों के ओपीडी में न बैठने की जानकारी नहीं थी।
दोहपर : 12:30 बजे। अस्पताल की प्रयोगशाला में सभी प्रकार के टेस्ट, मरहम-पट्टी, प्लास्टर, ईसीजी, इंजेक्शन और एक्सरे की सुविधाएं सामान्य रूप से जारी रहीं। क्रस्ना लैब में भी मरीजों को जांच सुविधा मिलती रही।
सामान्य ओटी और गायनी ओटी में केवल पहले से अस्पताल में भर्ती मरीजों के ही ऑपरेशन किए गए।