लंबी खींचतान के बाद देवता की प्रथम पूजा का विवाद सुलझा
हर साल बारी बारी प्रथम पूजा को लेकर बैठक में बनी सहमति
संवाद न्यूज एजेंसी
डैहर (मंडी)। लंबी जद्दोजहद के बाद सुकेत देवता मेले में प्रथम पूजा का विवाद सुलझ गया। अब की बार देव कमरूनाग की सर्वप्रथम पूजा होगी। मेला कमेटी के चेयरमैन और एसडीएम अमर नेगी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में इस पर सहमति बनी है। भविष्य में अब हर साल मूल माहूंनाग और देव कमरूनाग की बारी-बारी प्रथम पूजा से मेले का शुभारंभ होगा। इस विषय पर अधिकारिक आदेश पारित किए जाएंगे, ताकि भविष्य में भी ऐसे विवाद से बचा जा सके।
शुकदेव वाटिका से देवता मेले की शोभायात्रा निकलती है। बीते वर्ष शोभायात्रा की अगुवाई पर विवाद हो गया था। मूल माहूंनाग की पूजा के बाद मुख्य अतिथि को देव कमरूनाग की पूजा करने नहीं दी गई थी। देव कमरूनाग के गूर मुनी लाल ठाकुर ने बैठक में बीते 35 वर्ष के इतिहास को जोड़ कर पक्ष रखा। कमेटी के प्रधान भूप सिंह ने कहा कि 1976 के बाद देव कमरूनाग सुकेत देवता मेले में आ रहे हैं। उस समय से ही देवता की पूजा की जाती रही है। इधर, मूल माहूंनाग के गूर काहन चंद, कमेटी के महासचिव ईश्वर शर्मा और कोषाध्यक्ष जगन्नाथ ने कहा कि प्रथम पूजा पर सहमति बन गई है। मूल मांहूनाग की पूजा बीते वर्ष हुई है और इस बार देव कमरूनाग की प्रथम पूजा की जाएगी। इस पर हम पूरी तरह सहमत है।
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सुकेत के राजा विक्रम सेन से संबंधित है इतिहास
मान्यता है कि मूल माहूंनाग (जिन्हें महाभारत के कर्ण का रूप माना जाता है) से आशीर्वाद मिलने के बाद राजा विक्रम सेन को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई थी। इसके बाद सुकेत राज परिवार में मूल माहूंनाग का विशेष सम्मान स्थापित हो गया। तब से जब भी देवता करसोग से सुंदरनगर आते हैं, तो सुकेत के राजपरिवार की ओर से उनका स्वागत किया जाता है।
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सुकेत देवता मेला कमेटी के चेयरमैन एवं एसडीएम सुंदरनगर अमर नेगी ने कहा कि इस बार सुकेत देवता मेले में देव कमरूनाग की प्रथम पूजा की जाएगी। अगले वर्ष देव मूल माहूंनाग की प्रथम पूजा होगी। इस विषय पर अधिकारिक आदेश पारित किए जाएंगे।