मंडी। सरदार पटेल विश्वविद्यालय (एसपीयू) प्रशासन विद्यार्थियों से दो बार लिए गए परीक्षा शुल्क की करीब 15 लाख रुपये की राशि को एक साल बाद भी लौटा नहीं पाया है। फाइनांस और आडिट ब्रांच में शुल्क लौटाने की प्रकिया लटक कर रह गई है। अब फिर विश्वविद्यालय में परीक्षा का दौर शुरू हो रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने पिछले अनुभवों से कोई सबक न लेते हुए विद्यार्थियों से फिर परीक्षा शुल्क वसूल किया है।
एसपीयू में दाखिले के दौरान ही विद्यार्थियों से परीक्षा शुल्क लिया जा रहा है। जब परीक्षा का समय नजदीक आता है, तब परीक्षा शाखा भी शुल्क वसूल कर रही है। पिछले साल छात्र संगठनों ने इसके लिए आवाज बुलंद की थी। धरने-प्रदर्शन के साथ अधिकारियों का घेराव किया। इस पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने गलती को स्वीकार कर विद्यार्थियों को परीक्षा शुल्क लौटाने का आश्वासन दिया था।
एसपीयू के उच्च अधिकारियों की ओर से भी फाइनांस और आडिट ब्रांच को दिशा-निर्देश जारी किए थे। करीब 15 लाख रुपये विद्यार्थियों को वापस करना है। अभी तक यह राशि नहीं लौटाई गई है। अब परीक्षाओं के नाम पर शुल्क लेने पर छात्र संगठनों ने भौहें तरेर दी हैं। छात्र संगठनों के पदाधिकारियों का तर्क है कि दाखिले के दौरान परीक्षा शुल्क लेना तर्कसंगत नहीं है। कुछ विद्यार्थी बीच में पढ़ाई छोड़ देते हैं। दूसरा छह माह पहले परीक्षा शुल्क लेने का कोई औचित्य नहीं है।
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वित्त अधिकारी का किया घेराव
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इकाई की ओर से वित्त अधिकारी का घेराव किया। छात्रों ने बताया कि उन्होंने दाखिले के साथ ही परीक्षा शुल्क दिया है लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक बार फिर शुल्क वसूल लिया। इस दौरान विवि के सुंदरनगर कैंपस को एमएलएसएम काॅलेज को सौंपने पर भी आपत्ति जताई। इस भवन का उपयोग सभी छात्रों के हित में और पारदर्शिता के साथ किया जाना चाहिए। यह भवन क्षेत्रीय विकास और उच्च शिक्षा में सुधार के लिए बनाया गया था। परिषद के जिला संयोजक अमन ठाकुर ने कहा कि राज्य सरकार और उच्च शिक्षा विभाग को इस निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए।