करसोग (मंडी)। उपमंडल में कृषि प्रसार अधिकारियों के छह पद खाली हैं। इससे कृषि विक्रय केंद्रों में ताले लटके हुए हैं। किसानों को घर-द्वार बीज नहीं मिल रहा है। दूरदराज के क्षेत्रों से मजबूरन किसानों को कई किलोमीटर का सफर तय कर करसोग और पांगणा में एडीओ सर्किल जाकर बीज खरीदना पड़ रहा है। कृषि विभाग के इन दोनों ही सर्किलों में बीज खरीदने के लिए दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले किसानों को यह बीज बसों या गाड़ी करके घर ले जाना पड़ रहा है। इसमें किसानों का पैसा और समय दोनों बर्बाद हो रहा है।
किसान मुरारी शर्मा का कहना है कि कृषि विक्रय केंद्रों में किसानों को बीज उपलब्ध नहीं हो रहा है। ऐसे में बहुत से दुर्गम क्षेत्रों में बस सुविधा न होने से किसानों को बीज खरीदने के लिए मजबूरन गाड़ी करके जाना पड़ा रहा है। इस तरह यह बीज किसानों को बहुत महंगा पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से उपमंडल के अंतर्गत सभी कृषि विक्रय केंद्रों से बीज उपलब्ध कराए जाने की मांग की है, ताकि किसानों को घरद्वार पर बीज खरीदने की सुविधा मिल सके।
इन स्थानों पर खाली कृषि प्रसार अधिकारी के पद
उपमंडल में कृषि प्रसार अधिकारियों के छह पद खाली हैं। इसमें तत्तापानी, चुराग़, अलसिंडी, पांगणा, करसोग और करसोग हेडक्वाटर शामिल हैं। किसान अधिकतर गेहूं, मटर और आलू की बिजाई करते हैं। इसके अतिरिक्त किसान सब्जियां उगाने के लिए बीज खरीद रहे हैं। कृषि विभाग ने करसोग को मांग के अनुसार करीब 850 क्विंटल गेहूं, करीब 450 क्विंटल मटर, करीब 100 क्विंटल आलू, 100 किलो प्याज, 60 किलो पालक व 10 किलो के करीब मूली के बीज की सप्लाई भेजी है। अगर यही बीज कृषि विभाग के सेल सेंटरों में उपलब्ध होता तो किसानों को परेशानियों का सामना न करना पड़ता।
...
कृषि प्रसार अधिकारियों के पद खाली होने के कारण कृषि विभाग के सेल सेंटरों में बीज उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। जिला में कृषि प्रसार अधिकारियों के खाली पदों को भरने का मामला सरकार के समक्ष उठाया गया है।
-राम चंद्र चौधरी, कृषि उपनिदेशक जिला मंडी
000