जोगिंद्रनगर (मंडी)। जोगिंद्रनगर में पंजाब सरकार की 110 मेगावाट शानन और हिमाचल सरकार की 66 मेगावाट पनविद्युत बस्सी परियोजना में अचानक विद्युत उत्पादन ठप होने से 24 घंटे में अनुमानित दो करोड़ का नुकसान हुआ है। बरोट स्थित रिजर्वायर के ट्रेस रैक में कचरा फंसने से जब पेनस्टॉक में पानी की आपूर्ति ठप होने लगी तो अचानक पीक सीजन में विद्युत उत्पादन को रोकना पड़ा है।
दोनों ही विद्युत परियोजना में पानी की पर्याप्त मात्रा के चलते 110 और 66 मेगावाट विद्युत उत्पादन मई में अभी शुरू ही हुआ था। प्रतिदिन शानन परियोजना को एक करोड़, जबकि बस्सी परियोजना को करीब 70 लाख का राजस्व विद्युत उत्पादन से मिलना शुरू ही हुआ था। इसी बीच बरोट स्थित पंजाब सरकार के करीब 11 लाख मिलियन क्यूसिक मीटर पानी की क्षमता वाले रिजर्वायर के ट्रेस रैक में कचरा फंसने से विद्युत उत्पादन रोकना पड़ा है।
रिजर्वायर को फिर से साफ सुथरा बनाने के लिए शानन परियोजना के कई तकनीकी कर्मचारी मंगलवार देर शाम से बुधवार दोपहर तक डटे रहे। दोपहर करीब साढ़े तीन बजे रिजर्वायर में फिर से जलभराव होने के बाद शानन पावर हाउस की दो टरबाइनों में विद्युत उत्पादन शुरू हुआ और देर शाम पांच बजे के बाद पावर हाउस की सभी मशीनों में विद्युत उत्पादन शुरू होने से शानन परियोजना प्रबंधन को राहत मिली।
वहीं, शानन परियोजना के आरई सतीश कुमार ने बताया कि अगर समय रहते रिजर्वायर के ट्रेस रैक से कचरा नहीं हटाया होता तो दोनों ही विद्युत परियोजनाओं को इससे अधिक का नुकसान पहुंच सकता था। उधर, बस्सी परियोजना के आरई जितेंद्र कुमार ने बताया कि विद्युत परियोजना को भी लाखों का नुकसान उठाना पड़ा है।
कई जगह प्रभावित रही पेयजल की आपूर्ति
पन विद्युत परियोजना शानन और बस्सी में पानी की आपूर्ति ठप होने से जल शक्ति विभाग की पेयजल योजनाएं भी प्रभावित हुईं। इससे करीब 25 हजार पेयजल उपभोक्ता मंगलवार देर शाम से बुधवार देर शाम तक पानी के लिए तरसते रहे। जलशक्ति विभाग की कई पेयजल योजनाएं ठप हो जाने से मसौली, जलपेहड़, निचला गरोड़ू, दारट बगला, नेर घरवासड़ा पंचायत के अधीन आने वाले 18 गांव की 25 हजार पेयजल उपभोक्ताओं में पानी को लेकर बुधवार को हाहाकार मचा रहा। वहीं, द्राहल, कुठेहड़ा, बुहला भडयाड़ा में भी पानी की किल्लत बनी रही। आरठी, शानन और द्राहल पेयजल योजना के भी ठप रही। जलशक्ति विभाग जोगिंद्रनगर सब डिविजन के सहायक अभियंता प्रकाश चंद ने बताया कि पेयजल आपूर्ति के लिए बोरवेल और प्राकृतिक स्रोतों को भी उपभोक्ताओं के इस्तेमाल में लाकर कुछ राहत प्रदान की गई।