दुल्हन का मेकअप करती शालू। स्त्रोत- स्वयं
मंडी। बचपन के शौक को शादी के बाद पहचान मिली और आज शालू देवी अपने हुनर के दम पर आत्मनिर्भर बनने की राह पर अग्रसर है। यह कहानी है बलद्वाड़ा तहसील की ग्राम पंचायत खुडला के मनवाणा गांव निवासी 25 वर्षीय शालू देवी की।
शालू को बचपन से ही हाथों पर मेहंदी के तरह-तरह के डिजाइन बनाने और मेकअप करने का शौक था। मायके में पारिवारिक परिस्थितियां इस तरह की नहीं थी कि शालू अपने इस हुनर का तराश पाती। 12वीं की परीक्षा मेडिकल में उत्तीर्ण करने वाली शालू का विवाह मनवाणा गांव निवासी धर्मवीर से हुआ। धर्मवीर और उसके माता-पिता ने शालू के हुनर को तराशने का काम किया।
स्किल इंडिया के तहत शालू ने एक साल का मेकअप आर्टिस्ट का कोर्स किया। आज शालू के पास काम की कोई कमी नहीं है। शालू मौजूदा समय में मंडी शहर में अपने पति के साथ रहती है और होम सर्विस के तौर पर दुल्हनों का मेकअप करने और उन्हें मेहंदी लगाने का काम कर रही है। शालू ने बताया कि वह नौकरी करके किसी के अधीन नहीं रहना चाहती थी, इसलिए उसने स्वरोजगार की राह पर चलना ही उचित समझा। इसमें पति और सास-ससुर का पूरा सहयोग मिला। आज लोगों के खुद फोन आते हैं और वह घर पर जाकर महिलाओं को मेकअप और मेहंदी से संबंधित सेवाएं उपलब्ध करवा रही है।
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शालू ने बताया कि वह महीने का 20 से 30 हजार रुपये कमा लेती हैं और यह सब शादियों आदि के सीजन पर ही निर्भर करता है। शालू ने महिलाओं को संदेश देते हुए कहा कि अगर उनके अंदर भी कोई हुनर है तो उसे छुपाएं नहीं बल्कि सामने लाकर उसके माध्यम से स्वरोजगार को अपनाएं।
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