उन्होंने कहा कि कोष कार्यालयों के माध्यम से अब वेतन एवं अन्य अदायगियों के लिए इलैक्ट्रॉनिक सिस्टम लागू होने से समय और कागजी कार्रवाई से छुटकारे के साथ समय की बचत हुई है। ई-सिस्टम में थोड़ी सी खामी पैदा होने से इसका खामियाजा भी प्रदेश के लाखों कर्मचारियों को भुगतना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि कैपिटल ट्रेजरी शिमला में बात करने पर वेतन समय न मिलने के लिए एसबीआई को जिम्मेदार ठहराया गया। जब महासंघ के नेताओं ने बैंक के अधिकारियों सहित चंडीगढ़ शाखा में बात की तो बताया कि बैंक के स्तर पर कोई गलती नहीं है, बल्कि ट्रेजरी की ओर से इस बार सेलरी फारमेट 306 की बजाय 307 पर फीड करने और तीन जगह डाटा गलत डालने के अतिरिक्त हरियाणा स्टेट कॉपरेटिव बैंक का यूजर कोड डालने से कर्मचारियों के बैंक खातों में सेलरी डालने में मुश्किल पैदा हुई।
महासंघ ने वित्त सचिव और उपायुक्त मंडी से अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खाते में समय पर वेतन जमा करने के बारे में बैंक तथा कोष अधिकारियों से बात करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भविष्य में इस प्रकार की गलत की पुनरावृत्ति न हो इस बारे भी बैंक एवं कोष अधिकारियों को हिदायत देने का आग्रह किया ।