थुनाग (मंडी)। सराज क्षेत्र के पांडवशिला में सड़क निर्माण को लेकर उपजे विवाद के बीच राजस्व विभाग ने सोमवार को वादग्रस्त भूमि की निशानदेही पूरी की। ग्रामीण तिलक राज, रूप चंद, मोहर सिंह, कृष्ण कुमार, महेंद्र सिंह, रोहन ठाकुर और सुदर्शन ठाकुर का आरोप है कि उनकी जमीन (खाता-खतौनी नंबर 68 मिन/70, खसरा नंबर 1561/1026, क्षेत्रफल 00-12-08 हेक्टेयर) पर बिना सहमति सड़क बनाई जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि लोक निर्माण विभाग ने पहले भी बिना अनुमति सड़क बनाई थी। इसके कारण 30 जून 2025 की बाढ़ में उनके मकान और खेत पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। नाले में मलबा डंप होने से बाढ़ का खतरा और बढ़ा। उनका आरोप है कि प्रस्तावित सड़क (खसरा नंबर 1040 और 1045) से नाले का रास्ता और संकरा होगा, जिससे भविष्य में भारी तबाही की आशंका है।
आरोप के बाद नायब तहसीलदार की अगुवाई में डेढ़ दर्जन बन्नेदारों की मौजूदगी में हुई निशानदेही में रूशाड़ गांव की सड़क और पुलिया का हिस्सा ग्रामीणों की निजी भूमि पर अतिक्रमित पाया गया। जांच में वन भूमि पर भी अतिक्रमण का मामला सामने आया। इससे पहले शनिवार को ग्रामीणों ने चैल-जंजैहली मार्ग सात घंटे अवरुद्ध कर विरोध जताया था। इसके बाद एसडीएम थुनाग के निर्देश पर रविवार को निरीक्षण और सोमवार को निशानदेही की गई।
ग्रामीणों ने बताया कि आपदा से पांडवशिला-रूशाड़ सड़क 40 दिन से बंद है, जिससे 250 परिवारों को सेब और अन्य उपज बाजार पहुंचाने में भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। रूशाड़ खड्ड में दो लोग लापता हैं और 10 गाय व छह भेड़-बकरियां मलबे में दबी होने की आशंका है। ग्रामीणों का दावा है कि नाला अब अपने पुराने रास्ते पर बह रहा है, जिसे पहले अतिक्रमण कर उनकी जमीन की ओर मोड़ा गया था। उन्होंने खड्ड के बहाव को स्थायी रूप से पुराने रास्ते पर बनाए रखने की मांग की। एसडीएम रमेश कुमार ने बताया कि निशानदेही अंतिम चरण में है और पुनर्वास व सड़क बहाली का कार्य जल्द शुरू किया जाएगा।